
पारदर्शी न्यूज
लखनऊ। पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनावी रणनीति बनाने वाली कंपनी आई-पैक के साथ करार तोड़ दिया है। अखिलेश ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा- हां, हमारा संबंध उनसे था। कुछ महीने हमारे साथ उन्होंने काम किया। लेकिन, अब हम साथ काम नहीं कर पा रहे, क्योंकि हमारे पास फंड की कमी है, हम इतना फंड नहीं दे सकते। अखिलेश ने कहा कि कुछ लोगों ने हमें चुनाव जितवाने वाली कंपनी के बारे में बताया है। सलाह दी है कि सी-वोटर्स से सर्वे कराइए। एक एवीएम कंपनी है, उसको साथ रखिए। सोशल मीडिया पर किसी के खिलाफ नकारात्मक प्रचार करना हो तो 360 डिग्री कंपनी से जुड़िए। उसको फंडिंग करिए। सपा मुखिया ने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा- सोच रहे हैं कि नेशन विद नमो, जेविस जैसी कंपनियों से बात कर ली जाए। हम लोग बैठकर डील बनाएंगे। उनसे कहेंगे कि अगर हमारी सरकार बनवा देंगे तो सूचना विभाग का 90 फीसदी बजट आपको दिलवा देंगे। आई-पैक ही बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का चुनावी कैंपेन देख रही थी। यूपी में 2027 के लिए अखिलेश ने अपनी चुनावी रणनीति का काम आई-पैक को ही सौंप रखा था। आई-पैक ने ही 2021 में तमिलनाडु में डीएमके और पश्चिम बंगाल में टीएमसी को जीत दिलाने में मदद की थी। यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव और सीएम योगी को टक्कर देने के लिए अखिलेश ने आई-पैक के साथ करार किया था। जानकार बताते हैं कि तमिलनाडु के निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और ममता बनर्जी ने अखिलेश को आई-पैक हायर करने सलाह दी थी। दिसंबर, 2025 में अखिलेश ने कंपनी के पदाधिकारियों के साथ दिल्ली में पहली मीटिंग की। इस साल जनवरी में जब बंगाल गए तो दोबारा मुलाकात हुई। इसके बाद सपा ने आई-पैक को हायर किया। सूत्रों के मुताबिक, आई-पैक को चुनावी अभियान के साथ-साथ बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने, वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए एप-बेस्ड टूल्स का इस्तेमाल करने और विपक्षी पार्टियों की कमजोरियों पर फोकस करने का काम दिया गया था। अभी अखिलेश के लिए डेटा एनालिसिस के आधार पर रणनीति बनाने का काम मुंबई की कंपनी शो टाइम कंसल्टिंग कर रही है। जबकि, सर्वे का काम कर्नाटक की एक कंपनी के पास है। आई-पैक बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन के लिए काम कर रही थी। लेकिन दोनों जगह पार्टियां हार गईं। प्रशांत किशोर के हटने के बाद से आई-पैक कोई खास कमाल नहीं कर पा रही है। आई-पैक डायरेक्टर विनेश चंदेल को बंगाल चुनाव खत्म होते ही जमानत मिली। शर्त रखी गई है कि वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे। यानी अभी वे जांच के दायरे में रहेंगे। आई-पैक लखनऊ में काम करती तो संभव है कि ईडी लखनऊ भी आएगी। अखिलेश कानूनी पचड़े में नहीं पड़ना चाहते हैं। अखिलेश को शायद आशंका होगी कि आई-पैक के साथ उनकी विधानसभा चुनाव की प्लानिंग ईडी और केंद्र सरकार तक साझा हो सकती हैं।