
PARDARSHI VIKASH NEWS Madhya Pradesh हाईकोर्ट ने धार स्थित Bhojshala को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में कोर्ट ने भोजशाला का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंपते हुए हिंदुओं को यहां पूजा का अधिकार दिया है।मुस्लिम पक्ष इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष से मस्जिद के लिए सरकार से वैकल्पिक जमीन मांगने की बात कही है। फैसले के बाद धार और इंदौर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार होने के कारण संवेदनशीलता और बढ़ गई, क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज यहां जुमे की नमाज अदा करता है। प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।हिंदू पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि भोजशाला एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है और इस पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता। पक्षकारों ने 7 अप्रैल 2003 के ASI आदेश को निरस्त करने और भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर इसे पूर्ण रूप से हिंदू समाज को सौंपने की मांग की।मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Salman Khurshid और शोभा मेनन ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि भोजशाला मंदिर, मस्जिद या जैनशाला है। उन्होंने ASI सर्वे रिपोर्ट और वीडियोग्राफी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए।जैन समाज ने दावा किया कि जिस प्रतिमा को मां वाग्देवी बताया जा रहा है, वह जैन समुदाय की आराध्य मां अंबिका की प्रतिमा है। जैन पक्ष ने भोजशाला को जैन तीर्थ घोषित करने की मांग की।फैसले के बाद धार में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जिलेभर से करीब 1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया गया है। रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), रिजर्व पुलिस बल और अत्याधुनिक वज्र वाहन भी तैनात किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में लगातार फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है।धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा ने भोजशाला परिसर का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। प्रशासन के मुताबिक शहर की सुरक्षा 12 लेयर में की गई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।यह मामला 2022 में तब शुरू हुआ था, जब रंजना अग्निहोत्री और अन्य ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण अधिकार देने की मांग की थी।वर्ष 2024 में ASI ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी पर Supreme Court of India ने दिनभर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी।2003 से लागू व्यवस्था के तहत भोजशाला में मंगलवार और वसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा तथा शुक्रवार को मुस्लिम समाज को नमाज की अनुमति दी जाती रही है। बाकी दिनों में परिसर पर्यटकों के लिए खुला रहता है।