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भारत को दबाना चाहती हैं दुनिया की शक्तियां: सरसंघचालक

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पारदर्शी विकास न्यूज़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश की एकता, सामाजिक सद्भाव, विकास और राष्ट्र निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उन्होंने बांग्लादेश और फ्रांस जैसे देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में भी ऐसे हालात पैदा करने की कोशिशें हो रही हैं। उनके मुताबिक, इन शक्तियों का उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन करना नहीं, बल्कि अपने समर्थकों को सत्ता में बैठाना है।संघ के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने हिंदू समाज और भारत को बांटने की कोशिशों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। साथ ही कहा कि समाज को तोड़ने वाली मानसिकता को कभी-कभी राजनीतिक समर्थन भी मिल जाता है।

आंदोलन का उद्देश्य समाधान हो, समाज में विभाजन नहीं
मोहन भागवत ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलनों का उद्देश्य समाज में द्वेष और विभाजन पैदा करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि कई बार आंदोलनों का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए किया जाता है और वे राजनीति का साधन बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि देश और समाज को केवल नेता ही नहीं चलाते, बल्कि समाज की सक्रियता भी समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

एकता के सूत्र में बंधे रहेंगे तो कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा
संघ प्रमुख ने देश की एकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को कमजोर करने वाली शक्तियों के प्रभाव में आकर उत्तेजित होने के बजाय समाज को एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने बंगाल विभाजन और 1947 में हुए देश के विभाजन का उल्लेख करते हुए कहा कि जब समाज के लोगों के मन में अलगाव की भावना पैदा होती है, तो उसके गंभीर परिणाम सामने आते हैं उन्होंने कहा कि भारत की विविधता को विभाजन का आधार बनाने के बजाय सभी को साथ लेकर चलने की जरूरत है। छोटे-छोटे अहंकार छोड़कर देश के लिए काम करना हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए।

हमारे पूर्वज एक, सबको साथ लेकर चलना जरूरी
मोहन भागवत ने कहा कि भारत के लोगों के पूर्वज एक हैं और देश की संस्कृति का मूल भी एक है। किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है। भारत को ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे पूरी दुनिया को एकता, सद्भाव और शांति की प्रेरणा मिले।

विकास के साथ प्रकृति और नैतिकता का भी ध्यान रखें
संघ प्रमुख ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने नेपाल में बाढ़ जैसी घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि विकास के लिए तकनीक को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन इसके कारण प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। विकास की प्रक्रिया में अर्थव्यवस्था के साथ पर्यावरण और नैतिक मूल्यों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा विकास मॉडल अपनाना चाहिए, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी भी शामिल हो।

OTT प्लेटफॉर्म के नियम और AI का जिम्मेदार इस्तेमाल जरूरी
मोहन भागवत ने डिजिटल माध्यमों और नई तकनीक के प्रभाव पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज लोगों तक हर तरह की जानकारी पहुंच रही है, लेकिन सही और गलत की पहचान किए बिना उसका इस्तेमाल नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नियमों की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि सरकार तथा प्रशासन को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए।उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार इस्तेमाल की आवश्यकता बताते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग समाज और देश के हित में होना चाहिए।

कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी। विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना स्थापना दिवस मनाता है। वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन ही संघ की स्थापना हुई थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन को बताया प्रेरणादायक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत करने जैसे विषयों पर दिए गए संदेश को महत्वपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री ने स्वयंसेवकों की सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने पर जोर दिया।मोहन भागवत के संबोधन में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव, जिम्मेदार तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल विकास जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। उन्होंने देशवासियों से आपसी मतभेद और छोटे-छोटे अहंकार भुलाकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की अपील की।