
पारदर्शी विकास ब्यूरो कुशीनगर जनपद में पेराई सत्र 2026-27 हेतु गन्ना सर्वेक्षण कार्य शुरू हो गया है। जिला गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी ने बताया कि शासन की नई सर्वेक्षण नीति के तहत यह अभियान 30 जून 2026 तक संचालित रहेगा। इस बार सर्वेक्षण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया गया है, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ सही और निष्पक्ष तरीके से मिल सके।उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान खेतों में मौजूद वास्तविक गन्ना प्रजाति का ही अंकन किया जाएगा। कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मौके पर उपलब्ध वास्तविक किस्म को ही अभिलेखों में दर्ज करें, जिससे विभागीय आंकड़े वास्तविक स्थिति के अनुरूप तैयार हो सकें। इस बार केवल गन्ने के रकबे का विवरण ही नहीं, बल्कि गन्ने के साथ की जा रही सहफसली खेती (इंटरक्रॉपिंग), एग्रोफॉरेस्ट्री और फार्म फॉरेस्ट्री का भी अलग से रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे किसानों द्वारा अपनाई जा रही विविधीकृत खेती प्रणाली का सही आकलन हो सकेगा और भविष्य की योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा।इसके अलावा ट्रेंच विधि और जोड़ीदार पंक्ति (Paired Row) प्रणाली से की गई गन्ना बुवाई का भी अलग विवरण दर्ज होगा, जिससे यांत्रिक गन्ना कटाई के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।जिला गन्ना अधिकारी ने कहा कि विभाग का उद्देश्य टिकाऊ और लाभकारी खेती को बढ़ावा देना है, ताकि किसान आधुनिक तकनीकों और विविधीकृत खेती की ओर प्रेरित हों।गन्ना सर्वेक्षण से जुड़ी किसी भी समस्या या जानकारी के लिए गन्ना विकास विभाग द्वारा 24×7 टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 संचालित किया जा रहा है, जहां किसान अपनी शिकायत और सुझाव दर्ज करा सकते हैं।