

डॉ.नीरज वरयानी
(G.R.S HOSPITAL AND HEART CENTER)
हृदय मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो पूरे शरीर में रक्त को पंप करके ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुंचाने का कार्य करता है। यदि हृदय ठीक से काम न करे तो शरीर की पूरी प्रणाली प्रभावित हो जाती है। आज के समय में हृदय रोग (कार्डियोवैस्कुलर डिजीज) तेजी से बढ़ रही एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खान-पान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने इस बीमारी को और अधिक बढ़ा दिया है। हृदय रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आ रहा है। हृदय रोग कई प्रकार के होते हैं, जिनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, एरिदमिया (दिल की धड़कन का अनियमित होना) और हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) प्रमुख हैं। इनमें से कोरोनरी आर्टरी डिजीज सबसे सामान्य है, जिसमें हृदय की धमनियों में अवरोध उत्पन्न हो जाता है और रक्त प्रवाह बाधित होता है। इसके कारण हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। हृदय रोग के कारणों में सबसे प्रमुख कारण असंतुलित जीवनशैली है। आजकल लोग फास्ट फूड, तैलीय और अधिक कोलेस्ट्रॉल युक्त भोजन का अधिक सेवन करने लगे हैं। इससे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ता है और नसों में ब्लॉकेज की स्थिति पैदा होती है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब का सेवन भी हृदय को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। धूम्रपान करने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और रक्त संचार बाधित होता है। तनाव भी हृदय रोग का एक बड़ा कारण है। लगातार मानसिक दबाव और चिंता से रक्तचाप बढ़ता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। शारीरिक गतिविधियों की कमी भी हृदय रोग को बढ़ावा देती है। जो लोग दिनभर बैठे रहते हैं और व्यायाम नहीं करते, उनमें मोटापा बढ़ने की संभावना अधिक होती है, जो हृदय रोग का प्रमुख जोखिम कारक है। हृदय रोग के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे दिखाई देते हैं, लेकिन कई बार अचानक गंभीर स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। सीने में दर्द या दबाव महसूस होना सबसे सामान्य लक्षण है। यह दर्द कभी-कभी बाएं हाथ, कंधे, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है। सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक थकान, चक्कर आना, पसीना आना और दिल की धड़कन का अनियमित होना भी इसके प्रमुख संकेत हैं। कुछ मामलों में हार्ट अटैक अचानक होता है, जिसमें व्यक्ति को तेज सीने में दर्द के साथ बेहोशी भी आ सकती है। महिलाओं में हृदय रोग के लक्षण पुरुषों से थोड़े अलग हो सकते हैं। उनमें सीने में हल्का दर्द, थकान, उल्टी जैसा महसूस होना और सांस फूलना प्रमुख संकेत होते हैं। इसलिए इन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हृदय रोग से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण है स्वस्थ जीवनशैली अपनाना। संतुलित आहार इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। भोजन में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम वसा वाला भोजन शामिल करना चाहिए। तैलीय और जंक फूड से दूरी बनाना आवश्यक है। नमक और चीनी का अत्यधिक सेवन भी हृदय के लिए हानिकारक होता है।नियमित व्यायाम हृदय को मजबूत बनाता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक, योग, दौड़ या साइकिल चलाना दिल की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। व्यायाम से रक्त संचार बेहतर होता है और वजन नियंत्रित रहता है। इसके अलावा योग और ध्यान मानसिक तनाव को कम करते हैं, जिससे हृदय पर दबाव कम पड़ता है। धूम्रपान और शराब का सेवन हृदय रोग के सबसे बड़े कारणों में से एक है। इन्हें पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। धूम्रपान छोड़ने से कुछ ही समय में शरीर की रक्त वाहिकाएं बेहतर होने लगती हैं और दिल की कार्यक्षमता बढ़ती है।नियमित स्वास्थ्य जांच भी जरूरी है। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर की समय-समय पर जांच कराने से हृदय रोग की शुरुआती पहचान संभव होती है और समय रहते इलाज किया जा सकता है। जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।हृदय रोग के इलाज में दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव सबसे महत्वपूर्ण है। गंभीर मामलों में एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है। लेकिन अधिकतर मामलों में समय पर पहचान और सही देखभाल से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।आज के समय में हृदय रोग एक वैश्विक समस्या बन चुकी है, लेकिन इसे रोका जा सकता है यदि लोग अपनी आदतों में सुधार करें। स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और नशे से दूरी इस बीमारी से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। हृदय को स्वस्थ रखना केवल एक चिकित्सा आवश्यकता नहीं, बल्कि एक बेहतर और लंबा जीवन जीने की कुंजी है।