
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर (हैलट) अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में अत्याधुनिक ‘क्यू स्विच्ड एनडी याग लेजर मशीन’ शुरू की गई है। इस नई तकनीक से अब मरीजों को अनचाहे टैटू, जन्मजात निशान, तिल और चेहरे के दाग-धब्बों के इलाज के लिए निजी क्लीनिकों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस मशीन की मदद से ओपीडी में ही डे-केयर प्रक्रिया के तहत इलाज किया जाएगा, जिसमें मरीज को भर्ती होने की जरूरत नहीं होगी और वह उसी दिन घर जा सकेगा। विभागाध्यक्ष डॉ. डीपी शिवहरे के अनुसार यह लेजर मशीन त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाए बिना गहराई में मौजूद पिगमेंट को तोड़ देती है, जिसे शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाता है। इससे टैटू, झाइयां, सनस्पॉट्स और अन्य दाग-धब्बों में काफी सुधार होता है। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 10 से 15 मरीज ऐसे आते हैं जो टैटू हटाने या त्वचा संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंचते हैं। खासकर युवाओं में टैटू हटवाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक काले, नीले और गहरे रंग के टैटू हटाने में यह मशीन अधिक प्रभावी है। इसके अलावा चेहरे की झाइयों और असमान त्वचा रंगत को भी लेजर टोनिंग के जरिए सुधारा जा सकेगा। मशीन से टैटू हटाने के लिए आमतौर पर 4 से 5 सिटिंग की जरूरत होगी, जबकि एक सिटिंग का खर्च करीब 300 रुपये बताया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इससे मरीजों को कम खर्च में आधुनिक और सुरक्षित इलाज उपलब्ध हो सकेगा।