
पारदर्शी विकास ब्यूरो, कुशीनगर विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थली कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंदिर में गुरुवार को श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भिक्षु संघ कुशीनगर से जुड़े भिक्षुओं और उपासकों ने भगवान बुद्ध के समक्ष विशेष पूजन-अर्चन कर विश्व शांति, मानव कल्याण और समरसता की कामना की। इस दौरान बुद्ध प्रतिमा पर चीवर अर्पित किया गया तथा मंदिर परिसर बुद्ध वंदना और चेंटिंग के मधुर स्वरों से गुंजायमान रहा।म्यांमार मंदिर के प्रमुख भिक्षु भंते नंदका और भंते अशोक के नेतृत्व में विभिन्न बौद्ध विहारों एवं मठों में निवास करने वाले भिक्षुगण महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा के समक्ष पारंपरिक विधि-विधान से पूजा संपन्न की। श्रद्धालुओं ने भी पूजा में सहभागिता कर तथागत के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।पूजन के उपरांत भिक्षुओं ने महापरिनिर्वाण स्तूप और मुख्य मंदिर की परिक्रमा की। इस दौरान पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के उपदेशों का स्मरण करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भंते अशोक ने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश केवल किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि करुणा, मैत्री, अहिंसा और सद्भाव जैसे मूल्यों को अपनाकर ही विश्व में स्थायी शांति स्थापित की जा सकती है। उन्होंने बुद्ध के पंचशील सिद्धांतों को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि इनका पालन व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों के लिए लाभकारी है।इस अवसर पर भंते शील प्रकाश, भंते सों क्रान, भंते यशपाल, भंते उपाली, भंते सागरा, भंते विनयकीर्ति, भंते डॉ. कितिफान सहित अनेक भिक्षुगण उपस्थित रहे। श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत इस आयोजन ने बुद्ध की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया।