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पार्किंग विवाद में ट्रिपल मर्डर से लखनऊ दहला

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5 घंटे तक नहीं उठीं अर्थियां; डिप्टी सीएम के आश्वासन पर अंतिम संस्कार

 

पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। लखनऊ के सआदतगंज स्थित ब्राह्मण टोला में तीन लोगों की हत्या के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। कार पार्किंग और चबूतरे को लेकर हुए विवाद में शिवाजी तिवारी (62), उनके भाई शिवेंद्र तिवारी उर्फ शंभू और बेटे सुयश (30) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव घर पहुंचे तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने न्याय और सुरक्षा की मांग पूरी होने तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।

 

लखनऊ ट्रिपल मर्डर के बाद मेयर सुषमा खर्कवाल भी मौके पर पहुंची हैं। वह पीड़ित परिवार से मुलाकात कर रही हैं।

डिप्टी सीएम ने दिया भरोसा, फिर उठीं तीनों की अर्थियां

मंगलवार को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह और महापौर सुषमा खर्कवाल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। इस दौरान बाहर मौजूद लोगों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। परिजनों की मांगों को लेकर अधिकारियों और परिवार के बीच कई घंटे तक बातचीत चली। डिप्टी सीएम ने परिवार को सरकारी नौकरी, बच्ची की पढ़ाई का खर्च उठाने, सुरक्षा और लाइसेंसी हथियार उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाने और आरोपी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की बात भी कही। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। ब्रजेश पाठक और नीरज सिंह ने अर्थी को कंधा भी दिया।

बेटे की शादी की तैयारियों के बीच उजड़ा परिवार

मृतक शिवाजी तिवारी सचिवालय से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में जिला स्तर पर दायित्व निभा चुके थे। उनके भाई शिवेंद्र तिवारी विश्वविद्यालय में काम करते थे, जबकि सुयश बिजली के सामान का कारोबार करते थे। परिवार के अनुसार, सुयश की शादी 5 दिसंबर को होनी थी। घटना ने शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। परिजनों ने आरोपियों को कड़ी सजा देने और परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की।

पुलिस पर उठे सवाल, दो अधिकारी निलंबित

घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सआदतगंज के इंस्पेक्टर संतोष आर्या और चौकी प्रभारी अजय कुमार चौरसिया को निलंबित कर दिया। परिजनों ने पुराने विवादों को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। स्थानीय लोगों ने भी आरोप लगाया कि पहले शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई हुई होती तो घटना टल सकती थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

पार्किंग और चबूतरे का विवाद बना खूनी संघर्ष

जानकारी के मुताबिक, पड़ोसियों के बीच कार पार्किंग और घर के सामने बने चबूतरे को लेकर पहले भी विवाद हुआ था। सोमवार सुबह हुए संघर्ष के दौरान मारपीट के बाद गोलीबारी हुई, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई। मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। घटना के बाद इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया और प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है।

इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर पुराने विवादों के समय रहते समाधान और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब पीड़ित परिवार को न्याय, सुरक्षा और घोषित सहायता मिलने की प्रतीक्षा है।