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राष्ट्रीय लोक अदालत में सात दंपत्ति फिर बने जीवनसाथी

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में भावनात्मक और संवेदनशील माहौल देखने को मिला, जब वर्षों से अलग रह रहे सात दंपत्ति एक बार फिर साथ रहने को राजी हो गए। कचहरी परिसर में किसी के चेहरे पर खुशी थी तो कोई लंबे समय बाद परिवार से मिलकर भावुक हो उठा।किदवई नगर निवासी एक दंपत्ति, जो एक साल पहले मामूली विवाद के चलते अलग हो गए थे, अदालत के समझाने-बुझाने के बाद फिर से एक हुए। पत्नी और बच्चों से मिलते ही पति भावुक होकर रो पड़ा और सभी को गले लगा लिया। पत्नी भी भावुक हो गई और दोनों ने आगे साथ रहने का वादा किया।गोविंद नगर के एक अन्य दंपत्ति का विवाद घूमने न ले जाने को लेकर शुरू हुआ था, जो कोर्ट तक पहुंच गया था। न्यायिक अधिकारियों की समझाइश के बाद दोनों ने फिर से साथ रहने का निर्णय लिया।इसी तरह किदवई नगर के एक और मामले में तीन बच्चों के माता-पिता के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद भी समाप्त हो गया। दोनों ने आपसी सहमति से फिर से जीवन साथ बिताने का फैसला लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ जिला जज अनमोल पाल ने दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य सुलह-समझौते के माध्यम से त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। इस दौरान पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रोहित सिन्हा ने बताया कि कुल 55 पारिवारिक मामलों का निस्तारण किया गया, जिनमें सात दंपत्ति दोबारा साथ रहने को राजी हुए।नोडल अधिकारी के अनुसार, इस बार लोक अदालत में लाखों मामलों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है और अब तक हजारों मामलों का समाधान आपसी सहमति से किया जा चुका है।