
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) कानपुर शाखा ने रविवार को परेड स्थित IMA कॉन्फ्रेंस हॉल में स्किजोफ्रेनिया पर जागरूकता के लिए पत्रकार वार्ता आयोजित की। कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक बीमारियों को लेकर समाज में फैले अंधविश्वास और गलत धारणाओं को दूर करना रहा। डॉक्टरों ने बताया कि स्किजोफ्रेनिया कोई “स्प्लिट पर्सनालिटी” या लाइलाज बीमारी नहीं है। यह एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली मानसिक बीमारी है, जिसका सही समय पर इलाज मिलने पर मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।मनोचिकित्सकों ने कहा कि इस बीमारी के लक्षणों में भ्रम, अनसुनी आवाजें सुनाई देना, सामाजिक दूरी बनाना और असामान्य व्यवहार शामिल हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर ओझा-तांत्रिकों के बजाय तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।डॉक्टरों ने जोर देकर कहा कि इलाज में दवाओं के साथ परिवार का सहयोग बेहद जरूरी है। मानसिक रोगों को छुपाने के बजाय समय पर पहचान और उपचार ही सबसे प्रभावी उपाय है।कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के तहत मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं अब आम जनता को किफायती और सुलभ रूप में उपलब्ध हैं।डॉक्टरों ने संदेश दिया कि “समझ, सहयोग और समय पर इलाज” से स्किजोफ्रेनिया से पूरी तरह बेहतर जीवन संभव है।