
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने बैडमिंटन शटल की उड़ान और हवा में संतुलन बनाए रखने के रहस्य का अध्ययन किया है। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. संजय मित्तल और बीटेक-एमटेक छात्र मुकुल कुमार कंसारा ने विंड टनल में शटल के उड़ने के तरीके का परीक्षण किया। शोध में पंख वाले और नायलॉन के शटल को अलग-अलग परिस्थितियों में परखा गया।शोधकर्ताओं ने 20 से 70 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार वाली हवा में परीक्षण किया। इसमें पाया गया कि हवा में आगे बढ़ते समय शटल खुद घूमने लगता है। इस प्रक्रिया को ऑटोरोटेशन कहा जाता है। शटल का घूमना उसके पीछे लगे पंखों के आकार और उन पर पड़ने वाले हवा के दबाव को प्रभावित करता है।अध्ययन के अनुसार, नायलॉन के शटल के पंख अधिक लचीले होने के कारण तेज हवा में उनका आकार ज्यादा बदलता है। एक निश्चित रफ्तार के बाद पंख दबने या मुड़ने लगते हैं, जिसे बकलिंग कहते हैं। शटल के घूमने से पंखों के मुड़ने का खतरा कम हो सकता है। हवा की रफ्तार बढ़ने के साथ शटल के घूमने की गति भी बढ़ती है। शोध से शटल की उड़ान और उसके वायुगतिकीय व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी।