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वोटर लिस्ट अपडेट से बदला चुनावी गणित

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pardarshi vikas news kanpur 
 मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बाद कानपुर शहर की चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। बड़े पैमाने पर हुए सत्यापन के बाद 6 लाख 87 हजार 201 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इस बदलाव का असर शहर की सभी 10 विधानसभा सीटों पर साफ दिखाई दे रहा है और आगामी चुनाव में इसके परिणाम महत्वपूर्ण हो सकते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में जहां कई सीटों पर जीत का अंतर सीमित था, वहीं अब उससे कई गुना अधिक वोट कट जाने से समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। खासतौर पर शहर की 9 विधानसभा सीटों पर जितने वोटों से जीत हुई थी, उससे कहीं ज्यादा मतदाता सूची से बाहर हो चुके हैं।कानपुर की 10 विधानसभा सीटों में आर्यनगर, सीसामऊ और कानपुर कैंट जैसी सीटें पहले से ही कड़े मुकाबले वाली मानी जाती रही हैं। अब यहां बड़ी संख्या में वोट कम होने से राजनीतिक दलों की रणनीति भी बदलने लगी है। आर्यनगर में जहां पहले जीत का अंतर कम था, वहीं अब यहां हजारों वोट कटने से मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है। इसी तरह सीसामऊ और कानपुर कैंट, जो मुस्लिम बहुल सीटें मानी जाती हैं, वहां भी वोट कटने का असर सीधा चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।कल्याणपुर, गोविंदनगर, किदवई नगर और महाराजपुर जैसी सीटों पर भी बड़ी संख्या में मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं। महाराजपुर, जहां पिछली बार सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज हुई थी, वहां भी वोट कटने से समीकरण प्रभावित हुए हैं। गोविंदनगर और किदवई नगर में भी हजारों मतदाताओं के नाम हटने से चुनावी संतुलन में बदलाव देखा जा रहा है।शहर से बाहर की सीटों जैसे बिल्हौर, बिठूर और घाटमपुर में भी मतदाता संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि बिठूर में अपेक्षाकृत कम वोट कटे हैं, लेकिन बिल्हौर और घाटमपुर में भी इसका प्रभाव नजर आ रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर वोट कटने से सभी राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति नए सिरे से बनानी पड़ेगी। जिन सीटों पर पहले किसी दल की मजबूत पकड़ थी, वहां अब स्थिति पूरी तरह बदल सकती है। खासतौर पर उन सीटों पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना है, जहां जीत का अंतर पहले कम रहा था।प्रशासन के अनुसार, मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अप्रमाणित मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया गया है, ताकि सूची अधिक सटीक और पारदर्शी बन सके। हालांकि, जिन लोगों के नाम सूची से हट गए हैं, उनके लिए फिर से नाम जुड़वाने का विकल्प खुला है।मतदाता अपना नाम ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जोड़ सकते हैं या संबंधित अधिकारी के पास आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति नाम हटाए जाने से असंतुष्ट है तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर अपील भी कर सकता है। कानपुर में मतदाता सूची में हुए इस बड़े बदलाव ने आगामी विधानसभा चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए आंकड़ों के आधार पर राजनीतिक दल किस तरह अपनी रणनीति तय करते हैं और इसका चुनावी परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ता है।