

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी संस्थाओं में लंबे समय से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से काम लेने की व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था शोषण और अन्याय को बढ़ावा देने वाली हो सकती है। न्यायमूर्ति मनीष निगम ने प्रियंका कुमारी एवं अन्य की याचिका का निस्तारण करते हुए राज्य सरकार को मामले में विधि के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।मामला जिला अस्पताल मिर्जापुर में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त स्टाफ नर्सों से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे लंबे समय से नियमित कर्मचारियों की तरह लगातार सेवाएं दे रही हैं, लेकिन न तो उनकी सेवाओं को नियमित किया जा रहा है और न ही समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जा रहा है।याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता लवलेश शुक्ल ने पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि स्टाफ नर्सों द्वारा किया जा रहा कार्य नियमित प्रकृति का है और वे आवश्यक योग्यता के साथ लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रही हैं। ऐसे में उनके साथ समानता और न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों का पालन न करना स्थापित कानूनी सिद्धांतों का उल्लंघन है।अधिवक्ता ने अपने पक्ष के समर्थन में कई न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के प्रकरण पर कानून के अनुसार उचित निर्णय लिया जाए। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी लंबे समय से सरकारी संस्थाओं में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।