
PARDARSHI VIKASH NEWS वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल 2026 में शुरू हुई वार्ता के दौरान अमेरिका को आशंका थी कि इजराइल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को निशाना बना सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका ने मध्य-पूर्व के अपने सहयोगी देशों के जरिए तेहरान को सतर्क रहने का संदेश भेजा था। अमेरिका को डर था कि यदि दोनों शीर्ष वार्ताकारों पर हमला हुआ तो युद्धविराम और शांति वार्ता पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। उस समय ट्रम्प प्रशासन होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की कोशिश कर रहा था।रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में प्रस्तावित एक बैठक से पहले भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर हमले की आशंका जताई गई थी। सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान ने ईरानी विमान को फाइटर जेट की निगरानी में इस्लामाबाद तक पहुंचाया। वापसी के दौरान भी सुरक्षा अलर्ट मिलने पर विमान की मशहद में आपात लैंडिंग कराई गई और प्रतिनिधिमंडल सड़क मार्ग से तेहरान रवाना हुआ।इधर, कतर ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच अगला दौर का वार्ता पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के बाद हो सकता है। वहीं ईरान ने मोजतबा खामेनेई को कथित धमकी देने के मामले में इजराइल के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कराई है। अंतिम संस्कार को देखते हुए पूरे ईरान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और लाखों-करोड़ों लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया जा रहा है।इस बीच ईरान ने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से बचने की चेतावनी दी है और कहा है कि सभी जहाज तय समुद्री मार्ग का ही पालन करें। साथ ही ईरान ने फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित अपने परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों की एंट्री पर भी रोक लगा दी है। इन घटनाक्रमों के बीच मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है।