
पारदर्शी विकास न्यूज़ अमेठी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) अमेठी जिला इकाई द्वारा जिले में बढ़ती शैक्षिक अनियमितता, निजी विद्यालयों की मनमानी फीस वसूली, शिक्षा विभाग के अधिकारियों की शिथिलता तथा शैक्षिक भ्रष्टाचार के विरोध में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी अमेठी के माध्यम से सौंपा गया। ज्ञापन में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जिले के कई निजी विद्यालयों द्वारा शिक्षा का व्यवसायीकरण किया जा रहा है। विद्यालयों में अभिभावकों पर तय दुकानों से पुस्तकें, कॉपी एवं ड्रेस खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जो शासन के नियमों के विपरीत है। परिषद ने ऐसे विद्यालयों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। एबीवीपी ने शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर गरीब एवं वंचित बच्चों के प्रवेश में अनियमितता का भी मुद्दा उठाया। ज्ञापन में कहा गया कि कई महंगे निजी विद्यालय आरटीई नियमों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं। परिषद ने मांग की कि ऐसे विद्यालयों की जांच कर नियमों का सख्ती से अनुपालन कराया जाए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि निजी विद्यालयों द्वारा एडमिशन फीस, वार्षिक शुल्क तथा किताबों के नाम पर मनमानी वसूली की जा रही है। कई विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशनों की महंगी किताबें चलाकर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा परिषद से संचालित एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में भी अवैध फीस वसूली तथा बिना मान्यता के कक्षाओं के संचालन की शिकायतें उठाई गईं। विद्यार्थी परिषद ने इन सभी मामलों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं एबीवीपी के प्रांत सह मंत्री युवराज जी ने कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, व्यापार का नहीं। यदि निजी विद्यालयों द्वारा छात्रों और अभिभावकों का आर्थिक शोषण बंद नहीं किया गया तो विद्यार्थी परिषद व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगी। सरकार और प्रशासन को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करनी चाहिए।ज्ञापन देते समय प्रांत कार्यकारिणी सदस्य सुबोध तिवारी एवं हर्षित जायसवाल, मुसाफिरखाना नगर मंत्री अभिनव मौर्य, आदित्य प्रताप सिंह,तहसील संयोजक आदित्य पाण्डेय, क्रीश कुमार सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।