
नेहरू महाविद्यालय के ऐतिहासिक वट वृक्ष का हुआ अभिलेखीकरण
पारदर्शी विकास न्यूज़ ललितपुर। बुन्देलखण्ड के 100 विरासत वट वृक्ष दस्तावेजीकरण अभियान के अंतर्गत मानव ऑर्गेनाइजेशन, विकासार्थ विद्यार्थी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद), भारतीय जैव विविधता संरक्षण संस्थान तथा गौरैया बचाओ अभियान के प्रतिनिधियों ने नगर स्थित नेहरू महाविद्यालय ललितपुर परिसर में पहुंचकर वहां स्थित ऐतिहासिक वट वृक्ष का अभिलेखीकरण किया। इस दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डा.ओमप्रकाश शास्त्री ने वृक्ष के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1968 में महाविद्यालय की स्थापना के समय तत्कालीन मंत्री डा.शादी लाल दुबे, आयुक्त झांसी मंडल श्याम सुंदर लाल कक्कड़ तथा तत्कालीन जिलाधिकारी श्याम बिहारी लाल द्वारा इस वट वृक्ष का रोपण किया गया था। लगभग छह दशक बाद आज यह वृक्ष एक विशाल स्वरूप धारण कर चुका है और इसकी छत्रछाया में हजारों विद्यार्थियों ने शिक्षा प्राप्त कर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। डा.शास्त्री ने कहा कि यह वृक्ष महज एक पेड़ नहीं, बल्कि महाविद्यालय परिवार का जीवंत सदस्य है। उन्होंने बताया कि अब शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी इस वट वृक्ष को स्नेहपूर्वक बूढ़े काका कहकर संबोधित करेंगे। धार्मिक दृष्टि से वट वृक्ष को देव वृक्ष माना जाता है तथा यह भारत का राष्ट्रीय वृक्ष भी है। उन्होंने यह भी बताया कि विरासत वृक्ष संरक्षण की दृष्टि से शीघ्र ही इसके चारों ओर एक सुदृढ़ चबूतरे का निर्माण कराया जाएगा, जिससे इसकी सुरक्षा और संरक्षण को और मजबूती मिल सके। मानव ऑर्गेनाइजेशन एवं गौरैया बचाओ अभियान के संयोजक पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र के प्राचीन वट वृक्ष केवल पर्यावरणीय महत्व ही नहीं रखते, बल्कि वह हमारी सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के भी महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। ऐसे वृक्षों का दस्तावेजीकरण भविष्य की पीढिय़ों के लिए एक अमूल्य धरोहर सिद्ध होगा तथा इनके संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ेगी। विकासार्थ विद्यार्थी (अ.भा.वि.प.) के कानपुर प्रान्त सह-प्रमुख डा.राजीव कुमार निरंजन ने कहा कि संगठन का प्रत्येक सदस्य इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने तथा अधिकाधिक विरासत वृक्षों की पहचान एवं संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं की सहभागिता के बिना पर्यावरण संरक्षण का कोई भी अभियान पूर्ण नहीं माना जा सकता। पर्यावरण पत्रकार अमित लखेरा ने कहा कि नेहरू महाविद्यालय का यह वट वृक्ष केवल एक वनस्पति नहीं, बल्कि ललितपुर के शैक्षणिक इतिहास का जीवंत साक्षी है। ऐसे वृक्ष स्थानीय इतिहास, लोक स्मृतियों और सामाजिक चेतना को संरक्षित रखने का कार्य करते हैं। इसलिए इनके संरक्षण को जनभागीदारी से जुड़े व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए। अभियान के दौरान उपस्थित सदस्यों ने महाविद्यालय प्रशासन द्वारा वृक्ष संरक्षण के प्रति दिखाई जा रही संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए इसे पूरे बुंदेलखंड के लिए प्रेरणादायी पहल बताया। अभियान के अंतर्गत क्षेत्र के 100 प्राचीन एवं विरासत वट वृक्षों का दस्तावेजीकरण कर उनके संरक्षण एवं संवर्धन हेतु व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। इस अवसर पर अंकित चौबे तथा महाविद्यालय परिवार के माली सुरेश पाल का विशेष सहयोग रहा। अभियान के संयोजकों ने जनसामान्य से अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई प्राचीन, ऐतिहासिक या विरासत महत्व का वट वृक्ष है, तो उसकी जानकारी एवं फोटो 9452856288 अथवा 9235262399 पर साझा कर इस संरक्षण अभियान में सहभागी बनें।