
पारदर्शी विकास ब्यूरो तमकुहीराज (कुशीनगर)। जिले के तमकुहीराज क्षेत्र के गोड़ईता श्रीराम गांव में हल्दी-मेहंदी कार्यक्रम के बाद बची हुई मुर्गे की बिरयानी खाना एक परिवार और उनके रिश्तेदारों को भारी पड़ गया। बासी बिरयानी खाने से एक ही परिवार और रिश्तेदारों के 13 लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए। इनमें अधिकांश मासूम बच्चे हैं। सभी को उल्टी-दस्त की शिकायत होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तमकुहीराज में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उपचार चल रहा है। चार मरीजों की हालत में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।जानकारी के अनुसार गोड़ईता श्रीराम गांव निवासी हुसैन अली की पुत्री की शादी है। मंगलवार रात घर पर हल्दी और मेहंदी का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें मेहमानों और परिजनों के लिए मुर्गे की बिरयानी तैयार कराई गई थी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद काफी मात्रा में बिरयानी बच गई। बुधवार सुबह परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने वही बची हुई बिरयानी खा ली।बताया जाता है कि भोजन करने के कुछ घंटों बाद ही लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। एक-एक कर 13 लोगों को तेज उल्टी और दस्त की शिकायत हुई, जिससे घर में अफरा-तफरी मच गई। परिजन सभी बीमारों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तमकुहीराज ले गए।सीएचसी में अधीक्षक डॉ. हिमांशु मिश्रा, डॉ. संजय प्रसाद और डॉ. मजहर अली की टीम ने सभी मरीजों का तत्काल उपचार शुरू किया। डॉ. हिमांशु मिश्रा ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला फूड प्वाइजनिंग का प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि गर्मी और उमस के मौसम में लंबे समय तक रखा भोजन जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए बासी भोजन के सेवन से बचना चाहिए। सभी मरीजों को आवश्यक दवाएं और तरल पदार्थ (ड्रिप) दिए जा रहे हैं। चार मरीज पूरी तरह स्वस्थ होने पर घर भेज दिए गए हैं, जबकि अन्य की हालत भी खतरे से बाहर बताई जा रही है।अस्पताल में भर्ती मरीजों में आरिफ (2), अलसिफा (4), नजीफा (6), नाजिया (7), असरफ (7), आयान (7), आर्यन (7), दिलशाद (10), शाहिद (15), अरबीना (28), रुबीना (30), सदरुन नेशा (40) और मरियम (55) शामिल हैं। चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि गर्मी के मौसम में लंबे समय तक रखा भोजन खाने से बचें और किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री को सुरक्षित तरीके से संरक्षित करने के बाद ही उसका सेवन करें।