
PARDARSHI VIKASH NEWS इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालती आदेशों की अनदेखी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि न्यायाधीश सुपर रोबोट या सुपर कंप्यूटर नहीं हैं, जिनसे हर मामले में तुरंत फैसले की उम्मीद की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका पर भारी बोझ होने के बावजूद सरकारी अधिकारी अदालत के आदेशों की अवहेलना नहीं कर सकते।यह टिप्पणी न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र ने एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान की। मामला गाजीपुर निवासी शिक्षक राधेश्याम यादव से जुड़ा है, जिन्होंने वेतन भुगतान को लेकर वर्ष 2017 में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल 2022 को उनके पक्ष में नियमित वेतन देने का अंतरिम आदेश दिया था, लेकिन चार साल बाद भी आदेश का पालन नहीं किया गया।सुनवाई में जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से कहा गया कि सरकार ने आदेश निरस्त कराने के लिए आवेदन दाखिल कर रखा है। इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल आवेदन देने से अदालत का आदेश स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। जब तक सक्षम न्यायालय आदेश को स्थगित या रद्द न करे, तब तक उसका पालन अनिवार्य है।कोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक प्रकाश सिंह को अवमानना का दोषी मानते हुए मामले में आरोप तय करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 8 जुलाई 2026 को होगी।