
पारदर्शी विकास न्यूज़ बाँदा। माहे मुहर्रम का चाँद दिखायी देते ही शहर के इमामबारगाहों और अजाखानों में मजलिस, मातम और नौहाख्वानी का सिलसिला शुरू हो गया। आज सोमवार को शाम 5 बजे से विभिन्न इमामबारगाहों पर आयोजित मजलिसों में बड़ी संख्या में अकीदतमंदो ने शिरकत कर शहीदाने करबला, हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों को खिराजे अकीदत पेश किया। इस सिलसिले की पहली मजलिस का आयोजन शाम 5 बजे पूर्वी कोठी, डिग्गी चौराहा स्थित इमामबारगाह में हुआ। जिसमें गाजीपुर से तशरीफ लाये हुये मौलाना सैयद हैदर करबलाई साहब ने मिम्बर से खिताब फरमाया और फजायले इमाम हुसैन और उनके साथियों की हक और इंसानियत के लिये जानिसारी को बयान करते हुये अमन, चौन और इंसानियत का संदेश सारी दुनिया को दिया और हज़रत इमाम हुसैन, अहलेबैत और शोहदाये करबला के मसायब बयान किये। उन्होंने करबला के वाक्ये को इंसानियत, सब्र और कुर्बानी का बेहतरीन नमूना बताया। मजलिस के बाद अंजुमन अब्बासिया के साहिबे बयाज शमशुल हसन रिजवी ने नौहा पेश किया, जिसे सुनकर उपस्थित लोग गमगीन हो गये। उन्होंने नौहा पढ़ा-‘’ऐ हसलियों वाले मेरे बेशीर कहाँ है।‘’