
PARDARSHI VIKASH NEWS मथुरा-आगरा सीमा पर स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड तेजी से जैव विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। वैज्ञानिक सर्वेक्षणों और क्षेत्रीय अध्ययनों में यहां 200 से अधिक पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई है। इनमें स्थानीय और प्रवासी दोनों तरह के पक्षी शामिल हैं। यह वेटलैंड सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के अंतर्गत आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण विश्राम स्थल के रूप में कार्य कर रहा है।बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के ईकोलॉजिस्ट केपी सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और वन विभाग के संरक्षण में विकसित जोधपुर झाल में जल की पर्याप्त उपलब्धता, पोषक तत्वों की प्रचुरता और विविध माइक्रो-हैबिटेट्स के कारण पूरे वर्ष पक्षियों की मौजूदगी बनी रहती है। उन्होंने कहा कि यहां की जटिल खाद्य श्रृंखला और मजबूत पारिस्थितिकीय तंत्र विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों की उपस्थिति से स्पष्ट होता है।वेटलैंड क्षेत्र में नीलगाय, गोल्डन जैकाल, जंगली बिल्ली, खरगोश, नेवला और जंगली सूअर जैसे स्तनधारी जीव भी पाए गए हैं। इसके अलावा सरीसृप वर्ग में अजगर सहित आठ से अधिक प्रजातियां दर्ज की गई हैं। अध्ययन में कछुओं की तीन और मछलियों की चार प्रजातियों की मौजूदगी भी सामने आई है, जो स्वस्थ जलीय पारितंत्र का संकेत मानी जाती हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, भीषण गर्मी में भी यहां जलीय और तटीय पक्षियों की सक्रिय उपस्थिति वेटलैंड की उच्च पारिस्थितिकीय वहन क्षमता को दर्शाती है। यहां तितलियों और ड्रैगनफ्लाई की 20 से अधिक प्रजातियां भी रिकॉर्ड की गई हैं, जिन्हें पर्यावरणीय गुणवत्ता का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।ब्रज तीर्थ विकास परिषद के पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा ने बताया कि जोधपुर झाल वेटलैंड को पारिस्थितिकी, पक्षी विज्ञान, संरक्षण जीव विज्ञान और जलवायु परिवर्तन अध्ययन के लिए प्राकृतिक प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं सिटी फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर अतुल तिवारी ने कहा कि वन विभाग द्वारा वेटलैंड का वैज्ञानिक संरक्षण, सतत प्रबंधन और दीर्घकालिक मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि इसे आदर्श वेटलैंड संरक्षण मॉडल बनाया जा सके।