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जैव विविधता को जलस्रोतों और वनों को बचाएं

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पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ/अमेठी। विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर पर्यावरण सेवियों और जीव जंतु प्रेमियों ने वनों की अवैध कटान रोकने के साथ जीव जंतुओं के प्राकृतिक आवासों को नष्ट होने से बचाने के संदेश दिए हैं।22मई को पूरी दुनिया में विश्व जैव विविधता दिवस मनाया जाता है।इस वर्ष इसकी थीम दुर्लभ जीव जंतुओं और वनस्पतियों के संरक्षण को स्थानीय स्तर पर सामुदायिक प्रयास पर आधारित है। देश में नगर से ग्रामीण अंचल तक कंक्रीट के जंगल बढ़ने और मानव की अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वनों की अंधाधुंध कटान होने से पिछले पचास वर्षों के भीतर तमाम जीव जंतु और वनस्पतियां लुप्त हो गई हैं।पिन रेड डक,चीता और गैंडा अब भारत के जंगलों में नहीं मिलते।तमाम ऐसी वनस्पतियां भी लुप्त हो गई है जिनका उपयोग प्राकृतिक चिकित्सा में किया जाता रहा है। अमेठी जल बिरादरी के अध्यक्ष डॉ अर्जुन पांडेय ने कहा कि वनीकरण धरती की प्राचीन सुंदरता को वापस लाने का एक मात्र विकल्प और उपाय है, सरकार हर साल वृहद पौधारोपण के नाम पर लाखों पेड़ लगवाती है परंतु पौधरोपण के बाद उनकी सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं देता।जितने पेड़ लगते हैं उनकी सुरक्षा भी होनी चाहिए। पौधरोपण के बाद पौधों की सुरक्षा के लिए समुदाय में जन जागरुकता अभियान चलाया जाना चाहिए।जैव विविधता के लिए वनों का बढ़ना सबसे जरूरी है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ‘अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ के अवसर पर प्रदेशवासियों एवं प्रकृति प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “प्रकृति की विविधता ही जीवन की असली संपदा है। जैव विविधता का संरक्षण मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे, वन्य जीव, जल स्रोत एवं सूक्ष्म जीव मिलकर धरती पर जीवन का संतुलन बनाए रखते हैं। यदि किसी एक प्रजाति का अस्तित्व समाप्त होता है, तो उसका प्रभाव पूरे पर्यावरण तंत्र पर पड़ता है। इसलिए प्रकृति एवं जैव संसाधनों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन हेतु निरंतर प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। विगत वर्षों में प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है तथा जैव विविधता संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने आसपास के पर्यावरण, जल स्रोतों, वन्य जीवों एवं हरियाली के संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाएं।उप मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से प्रकृति संरक्षण, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया है।

 

वृक्ष धरती के श्रृंगार हैं।ये हमारी कई तरह की जरुरतों को पूरा करते हैं। वृक्षों की कमी और आक्सीजन का उत्सर्जन कम होने से दुनिया के कई शहरों में स्वच्छ प्राणवायु का संकट पैदा हो गया है।देश की राजधानी नई दिल्ली भी इसमें शामिल हैं।मैं उपदेश और भाषण में विश्वास नहीं करता। वृक्षारोपण और पेड़ पौधों की सुरक्षा को मैंने अपने जीवन का मिशन बनाया है। रेलवे की सरकारी सेवा में रहते हुए मैंने उत्तर भारत के कई रेलवे स्टेशनों के आसपास और रेल लाइनों के किनारे हजारों की संख्या में पौधे लगाए हैं। सेवा से अवकाश प्राप्त करने के बाद स्कूलों में जाकर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण की कक्षाएं लगाते हैं। बच्चों के साथ पौधरोपण करते हैं। सार्वजनिक स्थलों पर पेड़ लगाने के साथ गर्मी में पुराने पेड़ों की सिंचाई और उनको पानी देना हमारा रोज का काम है।-टी पी सिंह, पर्यावरण मित्र