
Pardarshi Vikas News Varanasi
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान में शनिवार को दो दिवसीय “एग्रो-इंडस्ट्री, अकादमिया एवं किसान सम्मेलन-2026” का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न कंपनियों, स्टार्टअप्स और किसान उत्पादक संगठनों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन कर तकनीकों एवं उत्पादों की सराहना की।
सम्मेलन के पहले दिन देशभर की 50 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियों और संगठनों ने भाग लिया। इनमें धनुका एग्रीटेक, कॉर्टेवा एग्रीसाइंस, बायर क्रॉप साइंस, जैन इरिगेशन सिस्टम्स, वीरबैक एनिमल हेल्थ सहित कई संस्थान शामिल रहे। प्रदर्शनी में बीज, उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्र, सिंचाई प्रणाली, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी एवं पशुपालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
कृषि विज्ञान संस्थान के विभिन्न विभागों ने भी शोध, नवाचार और छात्र परियोजनाओं पर आधारित स्टॉल लगाए। छात्रों द्वारा तैयार तुलसी, मल्टी-सौंफ आधारित हर्बल आइसक्रीम, आम एवं वनीला फ्लेवर आइसक्रीम तथा “महमाना प्रसादम्” जैसे उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण और कुलगीत से हुई। कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि कृषि को उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे उद्योग, प्रसंस्करण, विपणन और तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. समर सिंह, पूर्व कुलपति हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने “भारतीय कृषि का भविष्य: नवाचार, तकनीकी सुलभता एवं सतत विकास” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रिसिजन फार्मिंग भारतीय कृषि को नई दिशा दे रहे हैं।
डॉ. पी.के. चक्रवर्ती ने फसल संरक्षण, कीटनाशक प्रबंधन और जैविक विकल्पों को अपनाने पर जोर दिया। वहीं कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को शिक्षा के साथ नवाचार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए।
इसके बाद तकनीकी सत्रों में सतत कृषि, कृषि यंत्रीकरण, जल प्रबंधन, उन्नत बीज तकनीक, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी उद्योग और मूल्य संवर्धन पर चर्चा हुई। किसानों, वैज्ञानिकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने साझा मंच पर कृषि की चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का पहला दिन कृषि क्षेत्र में नवाचार और समन्वय की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हुआ।