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कबीर जयंती में हुआ कोरी समाज के इतिहास पर मंथन

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ईगो और मतभेद छोड़ सामाजिक एकता पर जोर दिया गया

पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ।  सोमवार को उद्यान निदेशालय के प्रेक्षागृह सभागार में आयोजित कबीर प्रकट दिवस समारोह में वक्ताओं ने संत कबीर और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का गुणगान करने के साथ कोरी समाज के इतिहास और अतीत पर भी मंथन किया। सांसद बृजलाल कोरी ने  समाज की धरोहर बचाने के लिए स्वयं की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे गए पत्र का उल्लेख करते हुए कोरी समाज के लोगों से सभी महापुरुषों की जयंती मनाने और गौरवशाली इतिहास से नई पीढ़ी को परिचित कराने के संदेश दिए। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की धरोहर के साथ छेड़छाड़ के प्रयास को रोकने के लिए हमने पांच मई 2025को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। पत्र का जबाब 13मई 2025को आया और कपिल वस्तु से निकाले गए भगवान बुद्ध के अस्थि कलश के अवशेष दिल्ली में सुरक्षित हैं।कोलिय वंश का सम्बन्ध भगवान बुद्ध के नाना महाराज अंजन से है। कोरी/कोलिय भगवान बुद्ध और संत कबीर के वंशज हैं। इस्लाम धर्म स्वीकार करने वाले जितने भी अंसारी हैं,सबकी जाति कोरी है। जनरल डायर को गोली मारने वाले वीर शहीद ऊधम सिंह का जन्म कौशाम्बी में एक कोरी परिवार में हुआ था। उनकी मां की मौत तपेदिक से हुई थी, पिता ने तपेदिक की डर से  पंजाब जाकर उन्हें एक नाऔलाद सिक्ख परिवार को सौंप दिया था।वीरांगना झलकारी बाई और पूरन कोरी ने भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अप्रतिम बलिदान किया है।कार्यक्रम के आयोजक किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के दन्त चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ हरीराम ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि नफरत के इस दौर में संत कबीर के विचार प्रासंगिक हैं। उन्होंने संसार को प्रेम की शिक्षा दी।प्रेम से ही विश्व में शांति आ सकती है।उत्तर प्रदेश कोरी/कोली संस्थान के अध्यक्ष राम सजीवन कोरी, महावीर प्रसाद, डिप्टी सेल टैक्स कमिश्नर के पी चौधरी, मुख्य कोषाधिकारी लखनऊ श्रीमती साधना कोरी, अरविंद शाक्य, कोरी समाज प्रतापगढ़ के जिला अध्यक्ष राजाराम कोरी, अधिवक्ता सरजू राम राव आदि ने संबोधित किया। इंजीनियर आर के सोनवानी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की ‌भंते दीपांकर, विश्व बौद्ध महासंघ के राष्ट्रीय संरक्षक आर सी बौद्ध, राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य शकुंतला भारती, मनीराम प्रबुद्ध आदि उपस्थित रहे।

 

भगवान बुद्ध और संत शिरोमणि कबीर साहब की शिक्षाओं में काफी सामान्य है। दोनों ने मानवता, प्रेम, करुणा और आत्मज्ञान का संदेश दिया है। वर्तमान में बौद्ध मिशन ही बहुजन समाज के लिए कल्याणकारी है।-राम चन्द्र बौद्ध ,राष्ट्रीय संरक्षक