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कबीर के आत्म ज्ञान, बुद्ध के अप्प दीपो भव का सार एक, कबीर बीजक में समाहित है बुद्ध की वाणी:आर सी बौद्ध

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कोरी समाज संगठन ने संडवा चंदिका की धर्मशाला में मनाई संत शिरोमणि कबीर की जयंती
दुनिया में प्रेम, शांति ‌और मानवता के कल्याण के लिए कबीर की वाणी को आत्मसात करना जरूरी



ललित कुमार/दिलीप कुमार

पारदर्शी विकास न्यूज़  प्रतापगढ़। कोरी धर्मशाला सण्डवा चंडिका धाम में सद्गुरु कबीर साहब की  629 वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में कबीर पंथी संत काली दीन दास ने संत शिरोमणि कबीर दास के सुंदर भजन प्रस्तुत किए। बौद्ध भिक्षु भंते संघ मित्र ने मंगल मैत्री का पाठ किया।  कार्यक्रम में प्रतापगढ़, अमेठी, सुल्तानपुर, रायबरेली, फैजाबाद और लखनऊ जिलों से भगवान बुद्ध,संत शिरोमणि कबीर‌ और बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के अनुयाई दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
 कार्यक्रम में   अंधविश्वास, पाखंड,वाह्याम्बर और कर्मकाण्ड से दूर रहते हुए  मानवता के कल्याण के लिए संत शिरोमणि कबीर और तथागत बुद्ध की शिक्षाओं को आचरण में लाने का संदेश दिया गया।  कोरी समाज संगठन की‌ ओर से आयोजित इस कार्यक्रम स्थल के पास कमला हास्पिटल की टीम ने कैम्प लगाकर सैकड़ों मरीजों का निःशुल्क इलाज किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बुद्ध ,संत शिरोमणि कबीर और बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई।
 काशी राम कोरी, अवकाश प्राप्त शाखा प्रबंधक राजाराम, पन्ना लाल, ज्ञान प्रकाश, सुदामा राम , अवकाश प्राप्त शाखा प्रबंधक मकदूम आदि ने अतिथियों का स्वागत सम्मान किया।अवकाश प्राप्त कमिश्नर और बसपा के पूर्व मंडल प्रभारी आर डी गौतम ने कहा कि कबीर साहब ने गृह जीवन में रहते हुए उच्च स्थान प्राप्त किया और दुनिया को सत्य, प्रेम, आत्मज्ञान और मानवता के संदेश दिए।  बामसेफ के जिला संयोजक और वरिष्ठ पत्रकार संजीव भारती ने कहा दुनिया में वर्तमान में सबसे अधिक चर्चा बुद्ध और कबीर की विचारधारा की हो‌ रही है।यही दो महापुरुष‌ ऐसे हैं जिनके उपदेश और वाणी को आत्मसात करके दुनिया में प्रेम , इंसानियत और शांति की बहाली हो सकती है। जगदीश बौद्ध ने कहा कि भगवान बुद्ध के संदेश को कबीर साहब ने अपने समय की सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार आगे बढ़ाया। विशिष्ट अतिथि राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य शकुंतला भारती ने कहा कि दुनिया में कबीर इस समय सबसे अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने दुनिया को शांति और प्रेम का संदेश दिया है।  फैजाबाद से आई सम्पत्ति कोरी ने सामाजिक कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष नागेश्वर नाथ कोरी ने कोरी समाज के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि कोरी समाज ने कपड़े का आविष्कार करके पूरी दुनिया को वस्त्र पहनाने का काम किया है। गौतम बुद्ध के नाना महाराज अंजन,शहीद ऊधम सिंह हमारे पूर्वज थे। उन्होंने कहा कि कोरी समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है, परंतु सीधे स्वभाव के कारण राजनीति में हमेशा छला गया है, समाज के लोगों को इस पर आत्मचिंतन की जरूरत है।

 


बुद्ध का दर्शन,कबीर की वाणी और महात्मा फुले का संघर्ष बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के जीवन दर्शन का आधार -,आर सी बौद्ध
कार्यक्रम को‌ मुख्य वक्ता के ‌रुप में विश्व बौद्ध संघ के राष्ट्रीय संरक्षक आर सी बौद्ध ने सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ अम्बेडकर का परिवार कबीर पंथ से प्रभावित था।बुद्ध का दर्शन, कबीर की वाणी और महात्मा फुले का जीवन संघर्ष बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के जीवन दर्शन और मानवतावादी मूवमेंट का आधार है। संत शिरोमणि रविदास‌ जी  ने बेगमपुरा और कबीर दास जी ने अमर देशवा की कल्पना की थी। आर सी बौद्ध ने कबीर बीजक को पढ़ने और समझने की सलाह दी और कहा कि बीजक में वे सारे संदेश है जो 2500वर्ष पहले भगवान बुद्ध ने दिए थे। कबीर आत्मज्ञान की बात करते हैं , बुद्ध ने अत्तदीपो भव का संदेश दिया दोनों का सार एक ही है।  डा शिवकरन कोरी ने अपनी कम्पनी कर्मभूमि इंडिया के कार्यों का उल्लेख करते हुए डिजिटल युग में युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया। लखनऊ से आए मनीराम प्रबुद्ध और महावीर प्रसाद ने अपने स्वरोजगार के प्रोजेक्ट की जानकारी दी और युवाओं को नौकरी के पीछे भागने के बजाय उद्यम और स्वरोजगार स्थापित करने पर जोर दिया।  कार्यक्रम का संचालन अवकाश पर शाखा प्रबंधक राजाराम ने किया।  सरजूराम एडवोकेट,मंगल कोरी, पन्ना लाल कोरी आदि ने भी सभा को संबोधित किया। अम्बेडकर सेवा समिति के अध्यक्ष संजय कुमार शास्त्री, बामसेफ के पूर्व विधानसभा संयोजक राम चन्द्र, विधानसभा संयोजक फूल चंद्र बौद्ध, श्याम लाल, ललित कुमार, सुनील कुमार,राम प्रसाद, श्याम कुमार, इन्द्र जीत उर्फ सोनू, सत्यम् एडवोकेट, रोहित कोरी आदि मौजूद रहे।


उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में कबीर साहब और भगवान बुद्ध के वंशजों के साथ भेदभाव हो रहा है। महापुरुषों की जयंती और अन्य जागरूकता के कार्यक्रम हमें समाज की समस्यायों पर आत्मचिंतन का अवसर होते हैं। हमारी किसी भी जाति या समाज से लड़ाई नहीं है।हम चाहते हैं कि 21फीसदी एस सी आरक्षण में कोरी समाज को आबादी के मुताबिक राजनीति और शासन-प्रशासन में भागीदारी मिलें। ब्यूरो क्रेसी और बड़े शिक्षण और मेडिकल संस्थानों में कोरी समाज की भागीदारी नगण्य है।
डा हरीराम
विभागाध्यक्ष, दन्त चिकित्सा विभाग, केजीएमयू लखनऊ



मेरी उम्र 84साल हो गई है। बहुत दिनों से समाज का काम कर रहा हूं। कबीर साहब की वाणी कहती नफरत दूर हो सत्य ,प्रेम और अहिंसा के बल पर सभी आगे बढ़े और प्रगति करें, दुःख इस बात का है सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन में आगे की पंक्ति में रहने वाला कोरी समाज बेईमानी का शिकार हुआ है।समाज का संगठन सबसे जरूरी है, अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।
हुबराज कोरी
पूर्व विधायक