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‘कहानी नौकरी की नहीं थी’ में जीवन और करियर की अनोखी झलक

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पारदर्शी विकाश न्यूज़ नई दिल्ली। आज के तेज रफ्तार कॉरपोरेट जीवन में जहां लोग लगातार डेडलाइन, टारगेट और करियर ग्रोथ के बीच भागते रहते हैं, वहीं एक आईटी प्रोफेशनल ने अपने अनुभवों को शब्दों में ढालकर लेखन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रकाश शर्मा की नई पुस्तक “कहानी नौकरी की नहीं थी – Employee ID से इंसान बनने तक की यात्रा” हाल ही में Amazon पर प्रकाशित हुई है। यह उनकी पाँचवीं पुस्तक है, जिसमें उन्होंने अपने करीब दो दशक लंबे आईटी करियर के अनुभवों को साझा किया है। लेखक का कहना है कि यह पुस्तक किसी मोटिवेशनल फॉर्मूले या कॉरपोरेट सक्सेस टिप्स पर आधारित नहीं है, बल्कि यह एक आम मिडिल क्लास जीवन की सच्ची कहानी है, जिसमें नौकरी, जिम्मेदारियां, रिश्ते और बदलता कॉरपोरेट माहौल साथ-साथ चलता है।इस किताब में तकनीक, डेडलाइन, लेऑफ्स, लीडरशिप और वर्कप्लेस चैलेंज जैसे पहलुओं के साथ-साथ मानवीय रिश्तों और जीवन के अनुभवों को भी सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने बताया कि लंबे समय तक आईटी सेक्टर में काम करते हुए उन्होंने न सिर्फ तकनीकी दुनिया को करीब से देखा, बल्कि लोगों के व्यवहार और कॉरपोरेट संस्कृति को भी समझा, जिसने इस किताब को आकार दिया।इस पुस्तक की एक खास बात यह है कि इसे Hinglish भाषा में लिखा गया है। लेखक के अनुसार, यह वही भाषा है जिसमें आज का भारतीय प्रोफेशनल अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को सहजता से जीता और महसूस करता है।पुस्तक को पाठकों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इसे एक रिलेटेबल कॉरपोरेट जर्नी के रूप में देखा जा रहा है, जो नौकरी के पीछे छिपी इंसानियत को सामने लाती है।