
PARDARSHI VIKASH NEWS Swami Avimukteshwaranand Saraswati की गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के दौरान कन्नौज में रात्रि विश्राम को लेकर विवाद खड़ा हो गया। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें निर्धारित स्थान पर रुकने नहीं दिया, जिसके चलते उन्हें सड़क किनारे चौराहे पर रात बितानी पड़ी। उन्होंने कहा कि जिस स्कूल में उनके ठहरने की व्यवस्था थी, वहां प्रशासन ने अनुमति पत्र मांगा और प्रबंधन पर दबाव बनाया गया। इसके बाद उन्होंने सरकारी भूमि पर ही रुकने का फैसला किया।शंकराचार्य ने दावा किया कि स्कूल प्रबंधन को बुलडोजर कार्रवाई की धमकी देकर कार्यक्रम रद्द कराया गया। उन्होंने कहा कि उनकी 81 दिनों की यात्रा गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के उद्देश्य से निकाली जा रही है और इसे प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। यात्रा 3 मई को काशी से शुरू हुई थी और उत्तर प्रदेश की सभी 402 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजर रही है।वहीं, Ashutosh Mohan Agnihotri ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रशासन ने शंकराचार्य को कहीं भी रुकने से नहीं रोका। उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था और संतों का सम्मान प्रशासन की प्राथमिकता है।जिस स्कूल में शंकराचार्य को ठहरना था, उसके संचालक मिलन दीक्षित ने बताया कि प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे थे। अनुमति न होने के कारण रात्रि विश्राम का कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। इसके बाद शंकराचार्य ने कन्नौज के पाल चौराहे के पास टेंट लगाकर रात बिताई और गुरुवार सुबह फर्रुखाबाद के लिए रवाना हो गए।