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महिलाओं के लिए न्याय की पहली उम्मीद है पुलिस स्टेशन:विजया रहातकर

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहातकर ने कहा कि पुलिस स्टेशन किसी भी महिला के लिए केवल सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि न्याय की पहली उम्मीद होता है। उन्होंने कहा कि महिला जब थाने पहुंचती है तो वह केवल एफआईआर दर्ज कराने नहीं, बल्कि न्याय और विश्वास की अपेक्षा लेकर आती है। ऐसे में पुलिस का व्यवहार, संवाद और संवेदनशीलता पीड़िता का आत्मविश्वास लौटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वह गुरुवार को राघवेंद्र स्वरूप सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय 'शक्ति और सुरक्षा: एडवांसिंग जेंडर सेंसिटिव पुलिसिंग' क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थीं।विजया रहातकर ने कहा कि महिला सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सुशासन का महत्वपूर्ण पैमाना है। जिस समाज में महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं, वहां शिक्षा, निवेश, आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति भी तेज़ी से होती है। उन्होंने कहा कि जेंडर सेंसिटिव पुलिसिंग राष्ट्र निर्माण का अहम आधार है और पुलिस को प्रत्येक महिला शिकायतकर्ता के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।उन्होंने एक पुराने मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि एक नाबालिग से गैंगरेप की घटना में पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। कानूनी प्रक्रिया का समय पर पालन नहीं किए जाने पर आयोग को संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करना पड़ा था। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर मामले में कानून के प्रावधानों का पूरी गंभीरता से पालन किया जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने जनसुनवाई के दौरान सामने आने वाली शिकायतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं पुलिस द्वारा समय पर सुनवाई न होने या बार-बार थाने बुलाए जाने की शिकायत करती हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पारिवारिक विवादों में पुलिस को कानून के दायरे में रहते हुए दोनों पक्षों को सुनकर उचित समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए, ताकि परिवार भी सुरक्षित रहे और न्याय भी सुनिश्चित हो।कार्यक्रम में कानपुर और आगरा जोन सहित दोनों पुलिस कमिश्नरेट के 17 जिलों से लगभग 200 पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक और उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की उपस्थिति में पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल और आईजी महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन सुभाष चंद्र दुबे भी मौजूद रहे।तकनीकी सत्रों में अधिकारियों को जेंडर सेंसिटाइजेशन, जीरो एफआईआर, पीड़ित प्रतिकर, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न सहित महिला सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दूसरे दिन साइबर अपराध, सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ अपराध तथा कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (POSH) जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों में महिला सुरक्षा संबंधी मामलों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और पीड़ितों को त्वरित एवं प्रभावी न्याय दिलाने की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना है।