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न्याय के रखवालों की सुनवाई कौन करेगा?

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चैंबरों पर चला बुलडोजर, वकीलों का फूटा गुस्सा

पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। राजधानी लखनऊ में जिला कोर्ट के आसपास बने वकीलों के चैंबरों पर नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। कार्रवाई के विरोध में वकील सड़क पर बैठ गए, नारेबाजी की और देखते ही देखते विरोध उग्र हो गया। कुछ वकील बुलडोजर पर चढ़ गए, जबकि कुछ उसके पहियों के सामने लेट गए। कई महिला वकील भावुक होकर रोने लगीं। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन चैंबर टूटने से नाराजगी बढ़ती गई।नगर निगम के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के तहत कचहरी परिसर के बाहर नाले, नालियों, फुटपाथ और सड़क पर बने अवैध निर्माण हटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित लोगों को नोटिस दिए गए थे और प्राप्त 14 आपत्तियों का निस्तारण भी किया गया था। 25 अक्टूबर को सुबह से शुरू हुई कार्रवाई में करीब 100 अवैध निर्माण तोड़े जाने की जानकारी दी गई। मलबा हटाने के लिए भी मशीनें लगाई गईं।वहीं, कई वकीलों ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें कोई वैकल्पिक जगह नहीं दी गई। कुछ भवन मालिकों ने अपने निर्माण को वैध बताते हुए कागजात दिखाने का दावा किया। कुछ लोगों ने नगर निगम पर वैध संपत्तियों पर भी गलत निशान लगाने का आरोप लगाया। वकीलों की मांग थी कि यदि कार्रवाई हो तो सभी संबंधित निर्माणों पर समान रूप से हो, किसी को चुनकर निशाना न बनाया जाए।नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, पहले सर्वे में 241 चैंबर चिह्नित किए गए थे। मई से अगस्त के बीच दो चरणों में 72 चैंबर तोड़े जाने की जानकारी दी गई थी। अब फिर बड़ी कार्रवाई से वकीलों में नाराजगी है। इससे पहले वकील हाईकोर्ट में नगर निगम के खिलाफ अपील लेकर पहुंचे थे, जिसे खारिज कर दिया गया। सड़क और फुटपाथ से अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के दौरान वैध-अवैध निर्माण की पहचान, समान नियम और प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे सवाल भी उतने ही अहम हैं। कानून के जानकारों और आम नागरिकों के मन में यही सवाल है—यदि किसी निर्माण की वैधता पर विवाद है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी? अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तभी भरोसा जीतेगी, जब नियम सबके लिए एक समान दिखाई देंगे।


पिछले साल 241 चैंबर चिह्नित किए थे
वकीलों ने धरना देकर पहले विस्थापित चैंबरों के लिए जगह देने की मांग की थी। करीब सालभर पहले हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका के तहत नगर निगम ने कैसरबाग में पुराने हाईकोर्ट परिसर, जिला सत्र न्यायालय, निबंधन कार्यालय और डीएम कार्यालय के आसपास सड़कों पर बने अवैध चैंबरों का सर्वे किया था। इसमें 241 चैंबर चिह्नित हुए थे, लेकिन अब तक 72 ही तोड़े गए हैं। इनमें से कई दोबारा बना लिए गए। 30 अगस्त को नगर निगम और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई केवल उन्हीं 72 चैंबरों तक सीमित रहने पर भी सवाल उठे थे, जिनका मामला कोर्ट पहुंचा था।


अधिकारी बोले- सभी अतिक्रमण हटाएंगे
सिविल कोर्ट से बलरामपुर अस्पताल-रेजीडेंसी रोड पर बने अवैध चैंबरों को हटाने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया था। नगर निगम के जोनल अधिकारी ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के तहत कचहरी परिसर के बाहर नाले, नालियों, फुटपाथ और सड़क पर बने सभी अवैध निर्माण हटाए जा रहे। संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।