
PARDARSHI VIKASH NEWS सुकरौली (कुशीनगर)। ग्राम सभा खोखिया मुबारकपुर में विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और शिकायतकर्ताओं के उत्पीड़न से जुड़ा मामला अब कानूनी चरण में पहुंच गया है। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में थाना अहिरौली बाजार पुलिस ने ग्राम प्रधान दुर्गेश प्रताप दुबे, मनोज शुक्ला, बृजराज शुक्ला और ध्रुव शुक्ला के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 115(2), 352, 351(3), 333 एवं 324(4) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर के बाद पूरे क्षेत्र में इस मामले की व्यापक चर्चा है।ग्रामीणों के अनुसार विवाद की शुरुआत लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा कराए गए मुख्य सड़क निर्माण और नालियों के चैंबरों की गुणवत्ता को लेकर हुई। उनका आरोप है कि वर्षों से जर्जर सड़क के निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया और कई स्थानों पर सीसी सड़क के बीच स्थित नाली चैंबर बंद कर दिए गए, जिससे जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो गई।इन आरोपों को लेकर गांव में बैठक हुई, जिसके बाद 61 ग्रामीणों ने हस्ताक्षरयुक्त शिकायत जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी मोतीचक को सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रारंभिक जांच से संतुष्ट न होने पर उन्होंने दोबारा शिकायत की। उनका यह भी दावा है कि शिकायत पत्र पर ग्राम प्रधान या उनके सहयोगियों के हस्ताक्षर नहीं थे और न ही वे उस बैठक में शामिल थे, जिसमें शिकायत तैयार की गई थी।ग्रामीणों के अनुसार 18 मई 2026 को विकास विभाग की जांच के दौरान ग्राम प्रधान और अन्य नामजद लोग अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे, जिसके बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनसे अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया और जान-माल की हानि पहुंचाने की धमकी दी गई।ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि शिकायत करने वालों को झूठे मुकदमों में फंसाने, मारपीट करने और भय का माहौल बनाने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि गांव में पहले भी मारपीट की गंभीर घटनाएं हो चुकी हैं, जिनसे जुड़े कुछ मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।सड़क निर्माण के अलावा ग्रामीणों ने अन्य कई मामलों की भी जांच की मांग उठाई है। इनमें धार्मिक स्थलों से जुड़े कथित अतिक्रमण, सार्वजनिक समरसेबल और उपकरणों के कथित निजी उपयोग, पीपल के चबूतरे के निर्माण में अनियमितता, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नाम पर प्राप्त धनराशि के उपयोग तथा अन्य विकास कार्यों में कथित गड़बड़ियों के आरोप शामिल हैं। इन मामलों में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत भी सूचनाएं मांगी गई हैं।कुछ ग्रामीणों ने यह आरोप भी लगाया है कि प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों से संबंधों का दावा कर प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर प्रभाव डालने का प्रयास किया जाता है। साथ ही ग्राम प्रधान के निवास, मतदाता सूची में नाम दर्ज होने की प्रक्रिया और चुनाव पूर्व की परिस्थितियों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब क्षेत्रवासियों की निगाह इस बात पर है कि विवेचना निष्पक्ष, पारदर्शी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ती है या नहीं।पुलिस का पक्ष: थाना अहिरौली बाजार पुलिस ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की विवेचना जारी है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी।