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नगर निगम में आरोपों का घमासान, आखिर किसकी क्या है कहानी?

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फाइलों से लेकर बेटे तक उठे सवाल


पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर।  कहीं मंडल मंत्री को बंधक बनाने का आरोप, कहीं नगर निगम की महत्वपूर्ण फाइलें गायब होने का दावा, तो कहीं भाजपा संगठन की भूमिका पर सवाल। विवाद के बीच महापौर प्रमिला पांडेय ने अपने बेटे अमित पांडेय का बचाव करते हुए सांसदों और विधायकों के परिजनों के कार्यालयों में बैठने का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सांसदों के बेटे और भाई तथा विधायकों के भाई कार्यालयों में बैठ सकते हैं, तो उनका बेटा नगर निगम कार्यालय में क्यों नहीं बैठ सकता? दूसरी ओर, बागी पार्षदों ने मंडल मंत्री के साथ अभद्रता और उन्हें रोके जाने के आरोप लगाए हैं। आखिर नगर निगम में यह विवाद कहां से शुरू हुआ और अब इसकी आंच भाजपा संगठन तक कैसे पहुंच गई?  कानपुर नगर निगम में महापौर प्रमिला पांडेय और बागी पार्षदों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को सदन की बैठक के दौरान शुरू हुआ विवाद अब महत्वपूर्ण फाइलें गायब होने के आरोप और भाजपा संगठन में शिकायत तक पहुंच गया है। मंगलवार को महापौर ने अपने बेटे अमित पांडेय उर्फ बंटी का बचाव करते हुए बागी पार्षदों पर गंभीर आरोप लगाए।विवाद की शुरुआत शनिवार को सदन की बैठक के दौरान हुई। भाजपा के बागी पार्षद आलोक पांडेय, पवन गुप्ता, लक्ष्मी कोरी और विकास जायसवाल ने आरोप लगाया था कि कौशलपुरी मंडल मंत्री मनीष बाजपेई को समिति कक्ष में रोका गया और उनके साथ अभद्रता की गई। पार्षदों के मुताबिक, मनीष सदन में पत्र रिसीव कराने पहुंचे थे। इस दौरान उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया। मनीष बाजपेई ने संगठन में भी शिकायत की थी।महापौर ने अपने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि अमित पांडेय पिछले 20 वर्षों से भाजपा के सक्रिय सदस्य हैं और संगठन के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि उनका बेटा कभी सदन या कार्यकारिणी की बैठक में बैठा हो, तो इसका प्रमाण दिखाया जाए। महापौर के मुताबिक, शनिवार को सदन में हंगामे की आशंका के चलते उन्होंने बेटे को रेस्ट रूम में बैठने के लिए कहा था।

महापौर प्रमिला पांडेय 


पार्षदों पर फाइलें ले जाने की साजिश का आरोप
महापौर ने आरोप लगाया कि चार पार्षद पहले से हंगामा करने की तैयारी करके आए थे और सदन की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कर शहर के एक बड़े नेता को लाइव दिखा रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वह एक घंटे पहले कार्यालय में मौजूद थीं, तब पार्षदों ने उन्हें पत्र क्यों नहीं दिया।महापौर ने यह भी दावा किया कि उनके कार्यालय के तीन कमरों और अलमारियों की जांच में कई महत्वपूर्ण फाइलें नहीं मिलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षदों की मंशा जरूरी फाइलें ले जाने और बाद में झूठे आरोप लगाने की हो सकती थी। हालांकि, फाइलें गायब होने और पार्षदों की मंशा से जुड़े आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।महापौर ने भाजपा संगठन के एक अध्यक्ष के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वह जिले के अध्यक्ष से बात करेंगी। उन्होंने पांचों बागी पार्षदों के खिलाफ सबूतों के साथ संगठन में शिकायत करने की बात भी कही। फिलहाल मंडल मंत्री के साथ कथित अभद्रता और फाइलें गायब होने, दोनों मामलों में जांच के नतीजे सामने आना बाकी हैं।