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पालि भाषा के संरक्षण को प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगा विश्व बौद्ध महासंघ

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पारदर्शी  विकास न्यूज़  लखनऊ। पालि भाषा के विकास, संरक्षण और संवर्धन के लिए विश्व बौद्ध महासंघ द्वारा जनपद और मंडल स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत लोगों को पालि भाषा से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, बीए और एमए की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आजमगढ़ के हरबंशपुर स्थित त्रिशरण बुद्ध विहार में विश्व बौद्ध महासंघ की मंडल इकाई की ओर से एक दिवसीय पालि भाषा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बुद्धघोष साहब ने की। मुख्य प्रशिक्षक केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रफुल्ल गड़पाल ने प्रतिभागियों को पालि भाषा के इतिहास, व्याकरण, उच्चारण, शब्द रचना, संधि और समास की जानकारी दी। डॉ. गड़पाल ने कहा कि पालि भाषा केवल बौद्ध धर्मग्रंथों की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर है। भगवान बुद्ध के मूल उपदेशों को समझने के लिए पालि भाषा का अध्ययन आवश्यक है। राष्ट्रीय संरक्षक आरसी बौद्ध ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा पालि को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने के बाद लोगों में इसके प्रति रुचि बढ़ी है। कार्यक्रम में महासंघ के पदाधिकारी, विद्यार्थी और बौद्ध साहित्य के अध्येता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।