
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की टिप्पणी पर विवाद बढ़ गया है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) कानपुर के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का अपमान बताया है। प्रो. विनय पाठक ने वीडियो जारी कर कहा कि वैज्ञानिक किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं होते, बल्कि वे देश की ज्ञान परंपरा और विकास में योगदान देने वाले लोग हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से ऐसे बयानों की निंदा करने और प्रियंका गांधी से अपनी टिप्पणी वापस लेने की मांग की। दरअसल, लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस अमेंडमेंट बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार से जुड़ी हाई पावर कमेटी में प्रो. वी. कामकोटि की सदस्यता पर सवाल उठाते हुए उन्हें "गोमूत्र विशेषज्ञ" कहकर टिप्पणी की थी। यह टिप्पणी प्रो. कामकोटि के गोमूत्र पर किए गए शोध के संदर्भ में की गई थी। प्रो. पाठक ने कहा कि प्रो. वी. कामकोटि देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं और IIT मद्रास जैसे प्रमुख संस्थान के निदेशक हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। देश की परंपरा में विद्वानों को हमेशा सम्मान दिया गया है।उन्होंने कहा कि शिक्षा और विज्ञान से जुड़े लोगों का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे बयानों से वैज्ञानिक सोच और शिक्षा के क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।गौरतलब है कि प्रो. वी. कामकोटि कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं और तकनीकी शोध के लिए जाने जाते हैं। परीक्षा सुधार से जुड़ी कमेटी में उनके शामिल होने के बाद यह राजनीतिक विवाद सामने आया है। कुलपति प्रो. विनय पाठक ने दोहराया कि किसी भी वैज्ञानिक के बारे में टिप्पणी करते समय उनके पद और योगदान की गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
"सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जो कमेटी बनाई है, उसमें ऐसे व्यक्ति को शामिल किया गया है, जिन्हें 'गोमूत्र विशेषज्ञ' के तौर पर प्रचारित किया जाता है। सवाल यह है कि देश की परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर कमेटी में विशेषज्ञता और योग्यता के आधार पर लोगों का चयन होना चाहिए या किसी अन्य आधार पर।" -प्रियंका गांधी
"वैज्ञानिक और शिक्षाविद किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं होते, बल्कि वे देश की ज्ञान परंपरा और विकास के लिए काम करते हैं। सदन में IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि को लेकर की गई टिप्पणी से देश के वैज्ञानिक और शिक्षाविद आहत हैं। किसी भी वैज्ञानिक के योगदान और उनकी गरिमा को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।" "प्रो. वी. कामकोटि देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं और IIT मद्रास जैसे संस्थान का नेतृत्व कर रहे हैं। सभी राजनीतिक दलों को ऐसे बयानों की निंदा करनी चाहिए और इस तरह की टिप्पणी को वापस लिया जाना चाहिए। वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का सम्मान देश की प्रगति और ज्ञान परंपरा के लिए जरूरी है।" -विनय पाठक