
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। शहर में सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। बर्रा-2 नई बस्ती स्थित कंपोजिट विद्यालय के जर्जर भवन के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर स्थानीय लोग पिछले दो दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि कई शिकायतों के बावजूद न तो प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों ने अब तक इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिया है। भूख हड़ताल पर बैठे विजय सिंह परिहार और विकास मिश्रा का कहना है कि विद्यालय की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। कक्षाओं की छतों से आए दिन प्लास्टर गिरता रहता है, जिससे बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है। विद्यालय में 172 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन भवन की खराब स्थिति के कारण प्रतिदिन केवल 25 से 30 बच्चे ही स्कूल पहुंच रहे हैं। अभिभावक भी हादसे की आशंका के चलते बच्चों को विद्यालय भेजने से डर रहे हैं।प्रदर्शनकारियों ने बताया कि विद्यालय परिसर की स्थिति भी बेहद खराब है। छुट्टी के बाद परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है और देर रात तक नशाखोरी होती है। सुबह स्कूल आने पर परिसर में शराब की बोतलें और गंदगी फैली मिलती है। इसके अलावा विद्यालय के शौचालय भी बदहाल हैं, जिससे छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में आसपास जमा गंदगी के कारण डेंगू, हैजा और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।भूख हड़ताल को स्थानीय लोगों के साथ विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। सपा युवजन सभा के प्रदेश सचिव धर्मेंद्र सिंह बाली ने कहा कि शहर में कई सरकारी विद्यालय जर्जर हालत में हैं, लेकिन उनकी ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा के लिए ऐसे विद्यालयों का शीघ्र पुनर्निर्माण कराया जाना चाहिए।प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराकर पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए। उनका कहना है कि जब तक इस संबंध में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए जर्जर स्कूल भवनों का जल्द सुधार किया जाना आवश्यक है।