
सहकारिता से समृद्ध होगा मत्स्य क्षेत्र: दीपक चौरसिया
जगनायक प्रधान
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस के अवसर पर सहकार भारती के राष्ट्रीय मत्स्य सहकारी प्रकोष्ठ का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन इंदिरा नगर स्थित आईसीसीएमआरटी (ICCMRT) के सेमिनार हॉल में आयोजित किया गया। सम्मेलन में देश के 18 राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मत्स्य पालन, सहकारिता, संगठन विस्तार, तकनीकी नवाचार तथा मछुआरा समाज के आर्थिक सशक्तिकरण पर विस्तार से मंथन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य मत्स्य पालन को आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बनाना और सहकारिता के माध्यम से मछुआरा समुदाय की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस रणनीति तैयार करना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय महामंत्री दीपक चौरसिया, राष्ट्रीय मत्स्य सहकारी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंती भाई केवट, राष्ट्रीय संयोजक रामदास शिंदे, राष्ट्रीय सह संयोजक जयदीप पाटिल, प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह, प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे तथा उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रमेश गौड़ कश्यप ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सभी अतिथियों का तिलक, पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर स्वागत किया गया।सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री दीपक चौरसिया ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में मछुआरा समाज का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि मत्स्य क्षेत्र देश की जीडीपी में लगभग 18 प्रतिशत तक योगदान देता है और लाखों परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से छोटे मछुआरों को संगठित कर उन्हें आधुनिक तकनीक, विपणन व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना समय की आवश्यकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य भी तेजी से पूरा होगा।राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंती भाई केवट ने कहा कि मत्स्य पालन केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और खाद्य सुरक्षा का मजबूत आधार भी है। उन्होंने आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, बेहतर प्रबंधन और सहकारी मॉडल से मत्स्य क्षेत्र में नई क्रांति लाई जा सकती है।कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक पद्धति से एक ही तालाब में मछली पालन और मखाना उत्पादन की तकनीक पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मॉडल को अपनाकर किसान और मछुआरे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण, युवाओं की भागीदारी, मत्स्य प्रशिक्षण, मूल्य संवर्धन, विपणन नेटवर्क और रोजगार सृजन जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।सम्मेलन का संचालन प्रदेश मंत्री कैलाश निषाद ने किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सह संयोजक (आईटी सेल) के.के. ओझा, अभिनव कश्यप, प्रदेश सह मीडिया प्रमुख सुशील कुमार, रामजी साहनी, मुकेश कश्यप, निर्मल सिंह मेहरा (पंजाब), तिलक राज, ईश्वरदीन सहित देशभर से आए प्रदेश संयोजकों, सह संयोजकों और प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। बैठक में संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करने, मत्स्य सहकारी समितियों के विस्तार, प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने तथा आधुनिक तकनीकों को मछुआरों तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मछुआरा समाज के सम्मान, उनके योगदान की पहचान और मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा देने का अवसर है। सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि सहकार भारती देशभर में मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत करने, मछुआरों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और युवाओं को इस क्षेत्र में स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने हेतु व्यापक अभियान चलाएगी। सम्मेलन का समापन राष्ट्र निर्माण में सहकारिता और मत्स्य क्षेत्र की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने के संकल्प के साथ हुआ।
"मछुआरा समाज देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ है। सहकारिता के माध्यम से उन्हें संगठित कर आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा, जब मत्स्य क्षेत्र को संगठित और सशक्त बनाया जाएगा।"
दीपक चौरसिया (राष्ट्रीय महामंत्री, सहकार भारती)
"सहकार भारती का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र को नई पहचान देना है। संगठन गांव-गांव तक पहुंचकर मछुआरों को सहकारिता से जोड़ रहा है। वैज्ञानिक मत्स्य पालन, प्रशिक्षण और संगठन विस्तार के माध्यम से रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।"
अरुण कुमार सिंह (प्रदेश अध्यक्ष, सहकार भारती)
"सहकारिता केवल संगठन नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है। मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयासों से मछुआरों की आय बढ़ाई जा सकती है। हमारा लक्ष्य हर मत्स्य पालक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।"
अरविंद दुबे (प्रदेश महामंत्री, सहकार भारती)
"मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का मजबूत आधार है। यदि वैज्ञानिक पद्धतियों और सहकारी मॉडल को अपनाया जाए तो मछुआरों की आय कई गुना बढ़ सकती है। हमारा प्रयास है कि देश का प्रत्येक मत्स्य पालक आत्मनिर्भर और समृद्ध बने।"
जयंती भाई केवट (राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय मत्स्य सहकारी प्रकोष्ठ)
"राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मछुआरा समाज के सम्मान का पर्व है। सहकार भारती संगठन विस्तार, प्रशिक्षण और जागरूकता के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।"
कैलाश निषाद (प्रदेश मंत्री, सहकार भारती)