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रात्रि चौपाल में जलापूर्ति की समीक्षा

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जलापूर्ति पर मंथन के बाद ग्रामीणों ने ली जल संरक्षण की शपथ


संजीव भारती
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ/गोरखपुर। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के दौरे के बाद गोरखपुर मंडल के सभी जिलों में जल जीवन मिशन के अन्तर्गत जल चौपालों का आयोजन तेज हो गया है। अभियंता गांवों में चौपाल लगाकर परियोजनाओं के सुरक्षित संचालन और जल की बर्बादी रोकने को लोगों को जागरूक कर रहे हैं। मुख्य अभियंता इंजीनियर वी पी सिंह ने बुधवार को कुशीनगर जिले की जल जीवन मिशन की परियोजनाओं की समीक्षा की। समीक्षा के बाद गोबरई में रात्रि चौपाल लगाकर ग्रामीणों से योजना का फ़ीड बैक प्राप्त किया।समीक्षा के दौरान उन्होंने एकल ग्राम पेयजल परियोजनाओं को दिसंबर -2026तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करते हुए जलापूर्ति शुरू करने के निर्देश दिए।समीक्षा बैठक में जिले में जल जीवन मिशन का काम देख रही फर्म-एन सी सी और वी टी एल के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।कुशीनगर में कुल 454 परियोजनाएं हैं।454नलकूफ लग चुके हैं।6465किलोमीटर के सापेक्ष 6310किमी जल वितरण प्रणाली का निर्माण पूरा हो चुका है।448पम्प हाउस और 332सोलर प्लांट भी बन गए हैं।अभी तक 651गांवों में नियमित जलापूर्ति शुरू हो चुकी है। मुख्य अभियंता इंजीनियर वी पी सिंह ने सभी फर्मों के प्रतिनिधियों और अभियंताओं को प्रतिदिन सुबह , दोपहर और शाम के समय जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।समीक्षा बैठक में अधिशासी अभियंता इंजीनियर सुनील कुमार, सहायक अभियंता विवेक कुमार और नीरज कुमार के साथ फर्म एन सी सी के प्रतिनिधि चरण सिंह और बी टी एल  के प्रतिनिधि संतोष कुमार टीपीआई और ए पी एम यू के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।



मुख्य अभियंता गोबरई में रात्रि चौपाल लगाई,जल संकल्प शपथ दिलाई
 कुशीनगर के हाटा विकास खंड की ग्राम पंचायत गोबरई में संचालित पेयजल परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद रात्रि चौपाल में ग्रामीणों से जलापूर्ति के बारे में फीड बैक लिया और लोगों को परियोजना के समुचित रखरखाव हेतु प्रेरित करते हुए जल संकल्प शपथ दिलाई।इस परियोजना में नलकूप,जल वितरण प्रणाली और पम्प हाउस का निर्माण पूरा हो चुका ‌है।8.7किमी जल वितरण प्रणाली से 452परिवारों तक हर घर तक नल से जल की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है।

इनसेट 2

 जल अर्पण दिवस पर लिया गया संकल्प -एक नजर
मैं पानी बचाने और उसके विवेकपूर्ण उपयोग हेतु शपथ लेता हूँ लेती हूँ। मैं यह भी शपथ लेता हूँ लेती हूँ कि मैं जल का समुचित उपयोग करूँगा / करूँगी। तथा पानी की हर एक बूंद का संचयन करूँगा / करूँगी और "कैच द रेन" अभियान को बढ़ावा देने में पूरा सहयोग दूँगा / देंगी। मैं नल से आने वाले जल का ही प्रयोग करूँगा / करूँगी और अपने आप को निरोगी बनाऊंगा / बनाऊंगी। मैं पानी को एक अनमोल संपदा मानूँगा / मानूँगी और ऐसा मानते हुए ही इसका उपयोग करूँगा / करूँगी । मैं शपथ लेता हूँ लेती हूँ कि मैं अपने परिवारजनों, मित्रों और पडोसियों को भी इसके विवेकपूर्ण उपयोग और उसे व्यर्थ नहीं करने के लिए प्रेरित करूँगा / करूँगी।हम गाँव, जिला, राज्य एवं देश को जल समृद्ध बनाने में भागीदार बनेंगे।



भारत सरकार ने जल जीवन मिशन को2028तक विस्तार किया है।जो कम्पनियां परियोजनाओं का काम कर रही हैं,वे दस साल तक उनके रखरखाव और अनुरक्षण के लिए जिम्मेदार है।इस बीच स्थानीय जल प्रबंध समितियों को परियोजनाओं को आगे सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रशिक्षित और जिम्मेदार बना दिया जाएगा।जल का सुरक्षित उपयोग, जल स्रोतों की सुरक्षा और जल का अपव्यय न होने देना सबसे अधिक जरूरी है। टोंटियां खुली न छोड़ी जांए और जल के एक एक बूंद का संचयन किया जाना चाहिए।-इंजीनियर वी पी सिंह ,मुख्य अभियंता