
ललित कुमार/दिलीप कुमार
पारदर्शी विकास न्यूज़ अमेठी। अमेठी को राष्ट्रीय राजनीति और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के केन्द्र में स्थापित करने वाले युवा हृदय सम्राट रहे संजय गांधी को अमेठी और कांग्रेस लगभग भूल सी गई है। मंगलवार को उनकी पुण्यतिथि पर कांग्रेस की ओर से कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए। उनके नाम से चल रहा संजय गांधी अस्पताल भी लगभग मौन रहा। संजय गांधी का जन्म ब्रिटिश भारत में 14दिसम्बर1946को दिल्ली में हुआ था। इंदिरा गांधी के इस छोटे लाडले ने कम समय में राजनीति में जो स्थान हासिल किया है,वह स्थान बहुत कम लोगों को मिलता है।1977में उन्होंने पहली बार अमेठी से लोकसभा चुनाव लडा , किंतु हार गए।1980के लोक सभा चुनाव में वे अमेठी से सांसद चुने गए परन्तु उनका कार्यकाल बहुत कम केवल पांच महीने रहा। 23जून 1980को दर्दनाक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु की घटना को लेकर संसद में लम्बी चर्चा हुई। जांच कमेटी गठित की गई।6अगस्त1981को सरकार ने जांच रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।जिस समय उनकी मौत हुई थी,उस समय विजय वरुण गांधी की उम्र केवल तीन माह दस दिन थी।संजय गांधी ने अमेठी के खेरौना गांव से श्रमदान की शुरुआत करके श्रमदान से समाजोपयोगी कार्यों का जो संदेश दिया, उसकी चर्चा आज भी होती है। उन्होंने अमेठी को एक ऐसा अस्पताल दिया, जो आज भी यहां की गरीब जनता को बेहतर चिकित्सा सेवाएं दे रहा है। मंगलवार को उनकी पुण्यतिथि थी। कांग्रेस ने किसी भी तरह के छोटे कार्यक्रम की भी जरूरत नहीं महसूस की। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप सिंघल ने सोशल मीडिया के माध्यम से ही संजय गांधी को याद किया। संजय गांधी अस्पताल में भी कोई कार्यक्रम नहीं हुआ।पूर्व प्रमुख राम मूर्ति शुक्ला का परिवार संजय गांधी को हमेशा याद करता था, परंतु पूर्व प्रमुख के पुत्र और वरिष्ठ पत्रकार रहे अरविंद शुक्ल के असामयिक निधन से यह परिवार काफी कुछ टूट चुका है, कोई कार्यक्रम नहीं कर पाता। संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत के बाद जांच को लेकर सबसे अधिक आवाज तत्कालीन साप्ताहिक समाचार पत्र अमेठी मेल ने उठाई थी। सूत्र बताते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सम्पादक पं राममूर्ति शुक्ल जी को बुलाकर खबरें प्रकाशित करने से मना किया था।
गांधी परिवार भी भूल गया
संजय गांधी को गांधी परिवार भी भूल गया है। संजय गांधी की राजनीतिक विरासत को राजीव गांधी ने आगे बढ़ाया।आज राहुल गांधी उनके सपनों को साकार करने में लगे हुए हैं, परंतु मंगलवार को राहुल गांधी की ओर से भी कोई पोस्ट शेयर नहीं की गई, जबकि वरुण गांधी ने दिल्ली अपनी मां के साथ पिता को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।