
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गोरखपुर में जलभराव की समस्या को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के नाम पर अरबों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर की स्थिति बदहाल है और आम जनता जलभराव से परेशान है।जारी बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि गोरखपुर की जनता अपने विधायक एवं मुख्यमंत्री से पूछ रही है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर जिस बड़े बजट का उपयोग कागजों में दिखाया गया, उसका वास्तविक लाभ आखिर शहर को क्यों नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सरकार को इस धन के उपयोग का सार्वजनिक हिसाब देना चाहिए।उन्होंने कहा कि जो लोग शासन और प्रशासन के नाम पर दूसरों को दोषी ठहराते रहे, वे अब अपने ही क्षेत्र की समस्याओं पर मौन हैं। उनका आरोप था कि सरकार को अपने ही शहर की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं दे रही है, जबकि जलभराव से आम लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।अखिलेश यादव ने मांग की कि जलभराव से प्रभावित लोगों के लिए तत्काल भोजन, पेयजल, दवाइयों, दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों और व्यापारियों को जलभराव के कारण आर्थिक नुकसान हुआ है, उन्हें बिना किसी भेदभाव के पारदर्शी तरीके से मुआवजा दिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मंदी से पहले ही जूझ रहे छोटे व्यापारियों के लिए जलभराव से हुआ नुकसान अतिरिक्त संकट बन गया है। ऐसे में सरकार का दायित्व है कि प्रभावित व्यापारियों की क्षति का आकलन कर उन्हें शीघ्र राहत प्रदान करे।सपा प्रमुख ने यह भी मांग की कि जलभराव के बाद संक्रामक बीमारियों की आशंका को देखते हुए व्यापक सफाई अभियान चलाया जाए तथा स्वास्थ्य विभाग को सतर्क रखते हुए आवश्यक दवाइयों और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।अखिलेश यादव ने सरकार पर व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो गोरखपुर को 'स्मार्ट सिटी' के बजाय 'जलनगरी' कहना अधिक उपयुक्त होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के विकास के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है तथा जनता अब इसका जवाब मांग रही है।