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सहकार भारती के झांसी विभाग अभ्यास वर्ग में सहकारिता पर मंथन

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पारदर्शी विकास न्यूज़  झांसी। सहकार भारती के झांसी विभाग का अभ्यास वर्ग 8 अक्टूबर को आयोजित किया गया। इसमें झांसी विभाग के अंतर्गत आने वाले जालौन, ललितपुर, झांसी महानगर और झांसी देहात के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। अभ्यास वर्ग में सहकारिता के उद्देश्य, संगठन की कार्यपद्धति, सहकारी संस्थाओं की भूमिका और समाज के आर्थिक विकास में सहकारिता के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि अनुसंधान, झांसी-कानपुर प्रांत से जुड़े सुशील कुमार चतुर्वेदी रहे। विशिष्ट अतिथि अनिल भाईसाहब, पूर्वी क्षेत्र कार्यवाह, सुनील गुप्ता, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सहकार भारती, प्रो. अवनीश कुमार, पूर्व अध्यक्ष हिंदी शब्दावली आयोग एवं डीएसटी, अरविंद दुबे, प्रदेश महामंत्री सहकार भारती तथा सतीश चंद्र कठेरिया, प्रदेश मंत्री सहकार भारती रहे। अभ्यास वर्ग की अध्यक्षता डॉ. संदीप सरावगी ने की, जबकि संचालन विभाग सह संयोजक सर्वेश पटेल ने किया।अभ्यास वर्ग के विभिन्न सत्रों में सहकारिता को गांव और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने तथा कार्यकर्ताओं की भूमिका पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि सहकारिता आपसी सहयोग और सहभागिता के आधार पर आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम है। सरकार द्वारा सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं और समितियों की भूमिका के बारे में भी कार्यकर्ताओं को जानकारी दी गई।प्रथम सत्र में सुनील गुप्ता मंच पर रहे और अध्यक्षता उदय सोनी ने की। द्वितीय सत्र में अरविंद दुबे मंच पर रहे तथा अध्यक्षता संतोष गुप्ता ने की। तृतीय सत्र में कैलाश निषाद एवं सुशील कुमार मंच पर रहे और अध्यक्षता धर्मेंद्र दुबे ने की। संचालन डॉ. प्रभाकर शास्त्री ने किया। अभ्यास वर्ग में कार्यकर्ताओं ने सहकारिता को मजबूत कर संगठन को गांव-गांव तक सक्रिय बनाने और अधिक लोगों को सहकारिता से जोड़ने का संकल्प लिया।




सहकारिता समाज के आर्थिक और सामाजिक विकास का प्रभावी माध्यम है। आपसी सहयोग की भावना से गांवों, किसानों और समाज के विभिन्न वर्गों को मजबूत किया जा सकता है। सहकारिता से जुड़ी संस्थाओं को सक्रिय बनाकर अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ पहुंचाने की आवश्यकता है।
– सुशील कुमार चतुर्वेदी, मुख्य अतिथि


सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि समाज को साथ लेकर चलने की व्यवस्था है। कार्यकर्ताओं को सहकारिता के मूल विचार को गांव और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चाहिए। संगठन के माध्यम से लोगों को जोड़कर आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता को मजबूत किया जा सकता है।
– अनिल भाईसाहब, पूर्वी क्षेत्र कार्यवाह


सहकार भारती का उद्देश्य देश में सहकारिता की भावना को मजबूत करना है। अभ्यास वर्ग कार्यकर्ताओं को संगठन की कार्यपद्धति और सहकारिता के महत्व को समझने का अवसर देता है। कार्यकर्ता अपने क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने और अधिक लोगों को सहकारिता से जोड़ने का प्रयास करें।
– सुनील गुप्ता, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, सहकार भारती


सहकारिता के क्षेत्र में स्पष्ट कार्यप्रणाली, जागरूकता और प्रशिक्षण की आवश्यकता है। समाज के विभिन्न वर्गों को सहकारिता से जोड़कर आर्थिक गतिविधियों को गति दी जा सकती है। ऐसे अभ्यास वर्ग कार्यकर्ताओं को विषय की समझ देने के साथ जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के लिए तैयार करते हैं।
– प्रो. अवनीश कुमार, पूर्व अध्यक्ष, हिंदी शब्दावली आयोग एवं डीएसटी


सहकारिता को मजबूत करने के लिए संगठनात्मक स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका जरूरी है। गांव-गांव तक सहकारिता की जानकारी पहुंचाकर लोगों को इससे जोड़ा जाना चाहिए। अभ्यास वर्ग के माध्यम से कार्यकर्ताओं को संगठन की गतिविधियों और सहकारिता के क्षेत्र में उनकी जिम्मेदारियों की जानकारी दी जा रही है। – अरविंद दुबे, प्रदेश महामंत्री, सहकार भारती


सहकारिता के माध्यम से समाज के लोगों को एक-दूसरे के सहयोग से आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। कार्यकर्ताओं को सहकारिता के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रहना चाहिए। संगठन का प्रयास है कि सहकारी व्यवस्था मजबूत हो और अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हों।
– सतीश चंद्र कठेरिया, प्रदेश मंत्री, सहकार भारती