
पारदर्शी विकास न्यूज़ अमेठी/प्रयागराज। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र संगठनों, विपक्षी दलों और विभिन्न जन संगठनों में खुशी का माहौल देखने को मिला। जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को इस घटनाक्रम से बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर गांव-कस्बों तक इस मुद्दे की चर्चा रही और कई स्थानों पर छात्रों व समर्थकों ने खुशी जताई। अमेठी में कांग्रेस नेता मो. कुद्दूस ने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री पहले इस्तीफा दे देते तो आंदोलनरत छात्रों पर बल प्रयोग की नौबत नहीं आती। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक सिंह हिटलर ने इसे जनता और युवाओं के संघर्ष की जीत बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक आवाज को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। भारतीय किसान संघ के जिला संयोजक आर.के. मिश्र ने भी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि युवाओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आ चुका है। एनएसयूआई के पूर्व जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्र ने इसे छात्रों की एकजुटता और लंबे संघर्ष का परिणाम बताया।उधर प्रयागराज में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर मिलते ही छात्र सड़कों पर उतर आए। पत्थर गिरजाघर, कटरा, सिविल लाइंस, सुभाष चौक, झूंसी, फाफामऊ और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के आसपास बड़ी संख्या में छात्रों ने रैलियां निकालीं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा समयबद्ध नियुक्तियों की मांग को लेकर नारेबाजी की। कई स्थानों पर छात्रों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी भी जताई।हालांकि प्रदर्शन के दौरान सुभाष चौक के पास एक भाजपा समर्थक की कार में तोड़फोड़ की घटना भी सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ अराजक तत्वों ने वाहन को नुकसान पहुंचाया। वहीं आंदोलन में शामिल कई छात्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और उपद्रवियों से उनका कोई संबंध नहीं है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रदर्शन के दौरान बीजेपी समर्थक की कार में तोड़फोड़
सुभाष चौक के पास प्रदर्शन के दौरान कुछ अराजक तत्वों ने रास्ते से गुजर रही कई बीजेपी समर्थक की कार में तोड़फोड़ कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन पर पार्टी का झंडा लगा होने के कारण कुछ लोगों ने उस पर हमला कर दिया। घटना के बाद मौके पर मौजूद कई छात्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और उपद्रवियों की हरकतों से उसका कोई संबंध नहीं है। घटना के समय पुलिस बल तैनात था, लेकिन तोड़फोड़ की वारदात से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।स्थानीय लोगों ने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।