
अमेठी पहुंची तुलसी यात्रा, हुआ भव्य आयोजन
तुलसी की चौपाई में मानवता का संदेश
पारदर्शी विकास न्यूज़ अमेठी। अवध भारती संस्थान और अवधी साहित्य संस्थान की ओर से रविवार को गोस्वामी तुलसीदास जयंती पखवारा के अन्तर्गत डाक-बंगले में तुलसी साहित्य में सामाजिक सद्भाव विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में एक दर्जन से अधिक कवियों ने तुलसी दास की रचनाओं पर केंद्रित कविता पाठ किया। अवधी के ख्याति लब्ध साहित्यकार और राष्ट्रपति की ओर से सम्मान प्राप्त डॉ राम बहादुर मिसिर , मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।संगोष्ठी में कवि और साहित्य प्रेमियों का सम्बोधन हिंदी और अवधी मिश्रित रहा। जगदम्बा प्रसाद त्रिपाठी मधुर ने अवधी में सावन गीत सुनाया।अनुपम पांडेय ने अपने पिता के समय की पुरानी यादों का उल्लेख करते हुए हिंदी और अवधी में अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि राम बहादुर मिश्र के प्रयास से अवधी साहित्य जगत में नित नई ऊंचाइयां हासिल कर रही है।कवि अजय जायसवाल -अनहद ने अपनी रचना में तुलसी की लेखनी और प्रभु राम का गुणगान करते हुए रचना पढी-सनातन धर्म का सम्मान और अपमान है तुलसी लखनऊ से आए नागेन्द्र बहादुर सिंह ने अवधी भाषा के विकास में हुए कार्यों का उल्लेख किया और कहा कि नेपाल में अवधी को राष्ट्र भाषा का दर्जा प्राप्त है।उन्होंने कहा कि राम चरित मानस में तुलसी दास की लेखनी हर रचनाकार को निष्पक्ष लेखन की सीख देती है। नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ने अपने नियमित कालम-परपंच से जुड़ने और अवधी की समृद्धि के लिए काम करने की अपील की।वरिष्ठ पत्रकार अम्बरीष मिश्र ने कहा कि आदि शंकराचार्य के बाद तुलसीदास ही हैं जिन्होंने सनातन संस्कृति को मजबूत करने का काम किया है। परहित सरिस धर्म नहिं भाई,पर पीड़ा नहि समझ अधमाई-यह चौपाई वर्तमान में सभ्य समाज की पहचान है।यह चौपाई मानवता के लिए तब तक प्रासंगिक रहेगी,जब तक यह सृष्टि है। लखनऊ से आए अरूण मिश्र ने कहा कि अवधी के विकास के लिए डा राम बहादुर मिश्र की ओर से 40साल से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं,इन प्रयासों का प्रतिफल सामने है, दुनिया में अवधी को जानने, समझने और बोलने वालों की संख्या बढ़ी है।अवधी हमारी भाषा और संस्कृति की पहचान है।राम कुमारी गुप्ता,समीर मिश्र ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से राम चरित मानस और तुलसी दास के काव्य संसार का गुणगान किया।वरिष्ठ पत्रकार संजीव भारती,सहारा जीवन के सम्पादक संतोष श्रीवास्तव, सत्येन्द्र शुक्ल, कैलाश शर्मा आदि मौजूद रहे।अवधी साहित्य संस्थान कय अध्यक्ष डॉ अर्जुन पांडेय कार्यक्रम कै संचालन केहेन।डा अर्जुन पांडेय कहेन कि रामचरित मानस से अधिक लोकप्रिय ग्रन्थ कौनों नाहीं बा,इ ग्रन्थ हर परिवार का जीवन जिए कै कला और संस्कार सिखावत है।
अवधी के विद्वान और अवध ज्योति पत्रिका के सम्पादक डॉ राम बहादुर मिश्र ने हिंदी,अवधी मिश्रित उद्बोधन किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में अवधी के विकास के क्रम में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। साहित्य अकादमी अवधी की समृद्धि को लेकर गंभीर है।अवध भारती संस्थान से तीन विश्व विद्यालयों ने अवधी की शिक्षा के लिए टाई-अप किया है।राम चरित मानस का अनुवाद तमाम यूरोपीय भाषाओं में हुआ है।15से20करोंड की आबादी के बीच अवधी बोली जाती है।छोटे छोटे साहित्यिक प्रयास अवधी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं। तुलसी जयंती पखवारा मनाने और तुलसी यात्रा निकालने का उद्देश्य तुलसीदास की रचनाओं को लेकर समाज में पैदा की गई भ्रांतियां दूर करने के साथ सामाजिक सद्भाव बढ़ाना है।कला, संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र में काम करने के लिए सरकार और समाज को सचेत और प्रेरित करना है।
सब पै कृपा कै होया तो हमरो बेडा पार केह्या----
संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रतापगढ़ से आए वरिष्ठ कवि अनीस देहाती ने की। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के गुणगान पर आधारित रचना का पाठ करते हुए तुलसी साहित्य के माध्यम से सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।