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तर्कशील सामाजिक चेतना के योद्धा थे पेरियार ललई सिंह यादव

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115वीं जयंती पर प्रदेशभर में याद किए गए सामाजिक चिंतक, अमेठी में भी हुआ कार्यक्रम

पारदर्शी विकास ब्यूरो | लखनऊ। उत्तर भारत के पेरियार के रूप में प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता ललई सिंह यादव की 115वीं जयंती मंगलवार को उत्तर प्रदेश के अमेठी, रायबरेली, कानपुर समेत एक दर्जन से अधिक जिलों में मनाई गई। विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में सामाजिक न्याय, समानता, जातिगत भेदभाव के विरोध और तर्कशील चेतना के लिए उनके संघर्ष को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी गई।1 सितंबर 1911 को कानपुर देहात के कठारा गांव में जन्मे ललई सिंह यादव ने सामाजिक रूढ़ियों और जातिगत असमानता के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया। वे पेरियार ईवी रामासामी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और बौद्ध विचारधारा से प्रभावित थे। उन्होंने शिक्षा, आत्मसम्मान, समानता और मानववाद को सामाजिक परिवर्तन का आधार माना।ललई सिंह यादव की पहचान ‘सच्ची रामायण’ के प्रकाशन और इसके पक्ष में लड़ी गई कानूनी लड़ाई से भी जुड़ी है। उन्होंने पेरियार ईवी रामासामी की पुस्तक का हिंदी रूपांतरण प्रकाशित कराया था। पुस्तक को लेकर कानूनी विवाद के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा।

अमेठी में बसपा कार्यकर्ताओं ने मनाई जयंती
 विभा गेस्ट हाउस में बसपा कार्यकर्ताओं ने ललई सिंह यादव की जयंती मनाई। कार्यक्रम का संयोजन जिला महामंत्री श्रवण कुमार यादव ने किया। मंडल प्रभारी नन्हे सिंह चौहान मुख्य अतिथि रहे।नन्हे सिंह चौहान ने कहा कि ललई सिंह यादव ने जातिभेद और शोषण के खिलाफ संघर्ष किया। उनके विचार आज भी सामाजिक चेतना के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि उनके इतिहास और विचारों को घर-घर तक पहुंचाने की जरूरत है।कार्यक्रम में बद्री प्रसाद प्रजापति, शिवराम, अरुण कुमार गौतम, राजपाल पाल, धर्मराज कोरी समेत कई कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।