news-details

उद्योग इकाइयों पर गहराया संकट

You can share this post!


दादानगर की 50% इंडस्ट्री बंद होने के कगार पर

पारदर्शी विकाश कानपुर। दादानगर औद्योगिक क्षेत्र की उद्योग इकाइयां गंभीर संकट से जूझ रही हैं। उद्योग प्रतिनिधियों का दावा है कि कानपुर की करीब 50 प्रतिशत इंडस्ट्री प्रभावित हो चुकी है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बढ़ती उत्पादन लागत, कच्चे माल की महंगाई, ऊर्जा संकट और श्रम संबंधी चुनौतियों ने उद्योगों की परेशानी बढ़ा दी है। कानपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव इस्टेट लिमिटेड के चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि दादानगर क्षेत्र में करीब 2500 फैक्ट्रियां संचालित हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में कई इकाइयों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालातों के कारण गैस, पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता तथा लागत पर असर पड़ा है, जिससे उद्योगों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि, बिजली दरों और कर संबंधी समस्याओं ने उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। ऐसे समय में उद्योगों को राहत और प्रोत्साहन की आवश्यकता है।विजय कपूर ने श्रम कानूनों के क्रियान्वयन को लेकर भी चिंता जताते हुए कहा कि उद्योग और कर्मचारियों के बीच वर्षों पुराने संबंध होते हैं तथा दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने प्रशासन से उद्योगों की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।वहीं ऑल इंडिया टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के उत्तर प्रदेश चेयरमैन बलराम नरूला ने कहा कि उद्योगों की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। उनका कहना है कि उद्योग और श्रमिक एक-दूसरे पर निर्भर हैं और वर्तमान परिस्थितियों में सभी पक्षों को मिलकर समाधान तलाशने की आवश्यकता है।उद्योग संगठनों ने सरकार से मांग की है कि औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए और उद्योगों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि उत्पादन, रोजगार और राजस्व पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को रोका जा सके।

दादानगर सहित कानपुर की औद्योगिक इकाइयां गंभीर संकट के दौर से गुजर रही हैं। वैश्विक परिस्थितियों, ऊर्जा संकट, गैस की कमी, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और बढ़ती उत्पादन लागत ने उद्योगों पर भारी दबाव बनाया है। उद्योग और श्रमिक एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों के हितों की रक्षा जरूरी है। सरकार को उद्योगों की मौजूदा स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और राहतकारी कदम उठाने चाहिए, ताकि उत्पादन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित न हों।-चेयरमैन विजय कपूर