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वीरांगना झलकारी बाई के बलिदान दिवस पर डा अम्बेडकर मार्केट मुंशीगंज की प्रतिमा पर माल्यार्पण और विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। बौद्ध रीति से सामूहिक त्रिसरण पंचशील के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हुए लोगों ने 1857के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना झलकारी बाई कोरी और पूरन कोरी के बलिदान का स्मरण करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दीकार्यक्रम में लोगों ने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार से वीरांगना झलकारी बाई की जयंती 22नवम्बर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग की। बामसेफ के जिला संयोजक संजीव भारती ने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई का जीवन दर्शन समाज की आधी आबादी के लिए प्रेरणा,साहस , शक्ति गौरव और सम्मान का प्रतीक है।इतिहासकारों की भेदभावपूर्ण लेखनी के कारण दलित समाज के शूर वीरों और वीरांगनाओं का इतिहास बहुत देर में प्रकाश में आया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में दलित और कमेरे वर्ग का सबसे बड़ा योगदान रहा है किन्तु उनके इतिहास को दबाने की असफल कोशिश की गई।बसपा के सेक्टर प्रभारी रामशंकर दानी ने कहा कि बहुजन संगठक अखबार में वीरांगना झलकारी बाई का इतिहास सबसे पहले प्रकाशित हुआ। बामसेफ के जिला सह संयोजक फूलचंद्र बौद्ध और राजेश कोरी ने वीरांगना झलकारी बाई और पूरन कोरी के इतिहास को घर घर पहुंचाने पर जोर दियाडा कालिका प्रसाद और ज्योति वर्मा ने वीरांगना झलकारी बाई के नाम से खेल पुरस्कार शुरू करने की मांग की।राम किशोर, बुद्ध राम,गुरुदीन,राम प्रसाद, गुरुचरण, रामसुंदर, राजेश, ज्योति वर्मा,राज बहादुर यादव,राम शंकर पासी आदि मौजूद रहे।