
पारदर्शी विकास न्यूज़ वाराणसी
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के सांख्ययोगतन्त्रागम विभाग में “सांख्ययोगशास्त्रे योगतत्त्व विमर्शः” विषय पर एक दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में योग, सांख्य और भारतीय दर्शन की गहन परंपरा पर विद्वानों ने विस्तार से विचार रखे और योग को केवल शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि आत्मबोध व चित्तशुद्धि का साधन बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. शीतला प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि भारतीय दर्शन में योग जीवन को संतुलित और दिव्य बनाने की वैज्ञानिक विधि है। उन्होंने कहा कि सांख्य और योग का समन्वय आत्मानुभूति की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है।मुख्य वक्ता प्रो. मार्कण्डेय नाथ तिवारी ने कहा कि सांख्य दर्शन तत्वों का विश्लेषण करता है, जबकि योग उनके व्यावहारिक अनुभव का मार्ग दिखाता है। विशिष्ट वक्ता प्रो. सुधाकर मिश्र ने आधुनिक समय में योग के दार्शनिक पक्ष की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम में कई शोधार्थियों ने योग, सांख्य सिद्धांत और आधुनिक जीवन में योग की उपयोगिता पर शोध प्रस्तुत किए। अंत में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर बल दिया गया।