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बांदा के प्रो. अरुण कुमार दुनिया के टॉप 5 वैज्ञानिकों में शामिल

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पारदर्शी विकास न्यूज़ बदौसा/बांदा। बुंदेलखंड की मिट्टी ने एक बार फिर दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है। जनपद बांदा के मूल निवासी और स्वर्गीय बाबू लाल सिंह कुशवाहा के छोटे पुत्र प्रो. अरुण कुमार ने वह उपलब्धि हासिल की है, जिस पर पूरा देश गर्व कर रहा है। कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च के क्षेत्र में उन्हें प्रतिष्ठित ैबपत्ंदा ळसवइंस की ताज़ा रैंकिंग में दुनिया के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान मिला है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और प्रतिभा की पहचान है, बल्कि बुंदेलखंड की शिक्षा, संस्कार और क्षमता का भी वैश्विक प्रमाण है। प्रो. अरुण कुमार की सफलता की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चित्रकूट इंटर कॉलेज, चित्रकूट से प्राप्त की। इसके बाद आईईआरटी, प्रयागराज से बीटेक और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में एमटेक किया। उनकी असाधारण प्रतिभा ने उन्हें दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, सिंगापुर तक पहुंचाया, जहां उन्हें पीएचडी के लिए स्कालरशिप मिली। पीएचडी के बाद उन्होंने एनटीयू में रिसर्च एसोसिएट, ताइवान की विश्वप्रसिद्ध एकेडेमिया सिनिका में पोस्ट-डाक्टोरल रिसर्च फेलो तथा नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में वरिष्ठ शोधकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण शोध कार्य किए। जब विश्व के प्रतिष्ठित संस्थान उनकी प्रतिभा का लाभ उठा रहे थे, तब प्रो. अरुण कुमार ने वर्ष 2018 में भारत लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने एनआईटी राउरकेला में प्रोफेसर के रूप में कार्यभार संभाला और आज वे देश के युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकों की शिक्षा देने के साथ-साथ विश्वस्तरीय शोध का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी कई शोध उपलब्धियां अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं और उनका कार्य वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में व्यापक रूप से उद्धृत किया जाता है।