
लखनऊ। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति चिकित्सा शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव एवं किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के दंत विभागाध्यक्ष डॉ. हरीराम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विभिन्न चयन, पदोन्नति एवं साक्षात्कार समितियों में आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधियों को चुनाव के माध्यम से भेजे जाने की मांग की है। 19 जून 2026 को भेजे गए पत्र में डॉ. हरीराम ने कहा है कि सरकार की “सबका साथ, सबका विकास” की नीति के बावजूद कुछ आरक्षण विरोधी और जातिवादी मानसिकता वाले तत्व चयन प्रक्रियाओं को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके कारण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते, जिससे आरक्षित पद लंबे समय तक रिक्त रह जाते हैं और इन वर्गों का प्रतिनिधित्व अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाता।
पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालयों, चिकित्सा संस्थानों एवं अन्य सरकारी विभागों में चयन समितियों, पदोन्नति समितियों, जांच समितियों तथा अनुशासन समितियों में आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधियों का नामांकन प्रायः संस्थान प्रमुखों द्वारा किया जाता है। ऐसे में कई बार ऐसे व्यक्तियों को नामित कर दिया जाता है जो आरक्षित वर्ग के हितों की प्रभावी पैरवी नहीं कर पाते।डॉ. हरीराम ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि विभिन्न समितियों में भेजे जाने वाले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों का चयन संबंधित संस्थानों के शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा चुनाव के माध्यम से कराया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) तथा राज्य लोक सेवा आयोगों की चयन एवं साक्षात्कार समितियों में भी आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधियों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की जाए।इसके अलावा उन्होंने विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में कुलपति, निदेशक एवं प्राचार्य जैसे उच्च पदों पर भी आरक्षण व्यवस्था का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग की है।डॉ. हरीराम ने कहा कि इससे चयन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, आरक्षित वर्गों को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिलेगा और संविधान की भावना के अनुरूप सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी।