
PARDARSHI VIKASH NEWS लखनऊ। KGMU के ट्रॉमा सेंटर के कैजुअल्टी वार्ड में चार नए नॉन-पीजी जूनियर रेजिडेंट (जेआर) डॉक्टरों ने कार्यभार संभाल लिया है। लंबे समय से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे ट्रॉमा सेंटर को इससे राहत मिलने की उम्मीद है। नई तैनाती के बाद मरीजों के इलाज में होने वाली देरी कम होगी और आपातकालीन सेवाएं अधिक सुचारु रूप से संचालित की जा सकेंगी।ट्रॉमा सेंटर में 400 बेड हैं, जहां प्रतिदिन 200 से 250 मरीज इमरजेंसी में पहुंचते हैं। मरीजों को सबसे पहले 42 बेड वाले कैजुअल्टी वार्ड में भर्ती किया जाता है। बेड भर जाने की स्थिति में 80 से 90 मरीजों का इलाज स्ट्रेचर पर करना पड़ता है।ट्रॉमा सेंटर में नॉन-पीजी जूनियर रेजिडेंट के 46 पद स्वीकृत हैं, लेकिन लंबे समय से केवल 26 डॉक्टर ही कार्यरत थे। मार्च में हुए साक्षात्कार के बाद 45 डॉक्टरों का चयन किया गया था, हालांकि 23 अभ्यर्थियों ने ज्वाइन नहीं किया। इसके अलावा 17 डॉक्टर अनुपस्थित हैं और तीन लंबे अवकाश पर हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने बॉन्ड व्यवस्था के तहत चार नए डॉक्टरों की नियुक्ति की है।ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि नई नियुक्तियों के बाद अब 46 स्वीकृत पदों के मुकाबले 30 डॉक्टर कार्यरत हैं। वर्तमान में प्रत्येक शिफ्ट में छह से सात डॉक्टर मरीजों की सेवा में तैनात हैं, जिससे आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी।