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मखाने के छिलके से मजबूत होगी काली मिट्टी

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कुशीनगर। रामकोला विकासखंड के सिधावें पठान पट्टी गांव निवासी शैलेष कुमार यादव ने अपनी शोध उपलब्धि से जिले का नाम रोशन किया है। आईआईटी पटना में शोधरत शैलेष के अध्ययन का चयन स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय शोध जर्नल Discover Civil Engineering में प्रकाशन के लिए हुआ है। उनका शोध जियोटेक्नोलॉजी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। शैलेष ने अपने अध्ययन में मखाने के बेकार समझे जाने वाले छिलके की राख (एफएनए) से कमजोर और फूलने-सिकुड़ने वाली काली मिट्टी को मजबूत बनाने की संभावनाओं का परीक्षण किया। शोध में मिट्टी में 5, 8 और 10 प्रतिशत राख मिलाकर प्रयोगशाला परीक्षण किए गए। परिणामों में मिट्टी की प्लास्टिसिटी और फूलने की प्रवृत्ति में कमी दर्ज की गई।अध्ययन के अनुसार, 28 दिन की क्योरिंग के बाद पांच प्रतिशत मखाने के छिलके की राख मिलाने से मिट्टी की अनकन्फाइंड कंप्रेसिव स्ट्रेंथ में 75 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई। वहीं, आठ प्रतिशत राख मिलाने पर इसमें 73 प्रतिशत वृद्धि पाई गई। शोध में मिट्टी के समेकन गुणों में भी सुधार सामने आया।प्रोफेसर डॉ. रामकृष्ण बाग के मार्गदर्शन में शोध कर रहे शैलेष का यह अध्ययन कृषि अपशिष्ट के उपयोग और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे निर्माण कार्यों में कमजोर मिट्टी को मजबूत बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। उनकी उपलब्धि पर परिजनों और क्षेत्रीय लोगों ने खुशी जताते हुए बधाई दी है।