
PARDARSHI VIKASH NEWSपृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर स्थित इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। नासा ने घोषणा की है कि 2028 से 2030 के बीच इसे नियंत्रित तरीके से अंतरिक्ष से हटाकर पृथ्वी पर गिराया जाएगा।ISS पिछले 25 वर्षों से मानव अंतरिक्ष अनुसंधान का सबसे बड़ा केंद्र रहा है और इसे अब तक की सबसे बड़ी मानव निर्मित अंतरिक्ष प्रयोगशाला माना जाता है। हालांकि, समय के साथ इसमें तकनीकी समस्याएं बढ़ती गई हैं और इसके रखरखाव पर भारी खर्च भी आ रहा है। इसी कारण नासा अब अपने संसाधनों को चंद्रमा और मंगल मिशनों पर केंद्रित करना चाहता है।इस पूरी प्रक्रिया के लिए लगभग 1 अरब डॉलर (करीब 9500 करोड़ रुपये) का बजट तय किया गया है। योजना के अनुसार, ISS को धीरे-धीरे उसकी कक्षा से हटाया जाएगा और फिर एक विशेष यान की मदद से इसे पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कराया जाएगा। वायुमंडल में घर्षण के कारण इसका अधिकांश हिस्सा जलकर नष्ट हो जाएगा।जो अवशेष बचेंगे, उन्हें सुरक्षित रूप से दक्षिण प्रशांत महासागर के “पॉइंट नीमो” क्षेत्र में गिराया जाएगा, जिसे अंतरिक्ष कचरे के निपटान के लिए दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है। इस क्षेत्र में पहले भी सैकड़ों पुराने सैटेलाइट और अंतरिक्ष मलबा गिराया जा चुका है।ISS को अंतरिक्ष में मानव सभ्यता की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है। इसमें 19 देशों के 250 से अधिक अंतरिक्ष यात्री अब तक यात्रा कर चुके हैं। यहां 6 से 8 अंतरिक्ष यात्री लगभग 6 महीने तक रह सकते हैं।अब इसकी जगह निजी कंपनियां और देश नए अंतरिक्ष स्टेशन बना रहे हैं। नासा, चीन और भारत सहित कई देश भविष्य में अपने-अपने स्वतंत्र अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।इस तरह ISS का अंत एक युग का समापन माना जा रहा है, जो अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज रहेगा।