
PARDARSHI VIKASH NEWS वाराणसी के फूलपुर क्षेत्र के घमहापुर गांव में कारोबारी मनीष सिंह (38) की पीट-पीटकर हत्या के 13 दिन बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील है और गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। हर चौराहे और गली में सुरक्षा बल तैनात हैं, जिससे ग्रामीणों में भय और असहजता बनी हुई है।घटना 26 अप्रैल की रात की है, जब मनीष सिंह अपनी फैक्ट्री से घर लौट रहे थे। रास्ते में एक महिला को कार से हल्की टक्कर लगने के बाद विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। ग्रामीणों ने पहले कार पर हमला किया और फिर मनीष को घेरकर ईंट-पत्थरों से बुरी तरह पीटा। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।हत्या के बाद से गांव में तनाव का माहौल है। पुलिस और पीएसी की भारी तैनाती के बीच बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। कई जगह बैरिकेडिंग लगाई गई है और पुलिस लगातार गश्त कर रही है। गांव में डर का माहौल इतना है कि लोग खुलकर बात करने से बच रहे हैं।मृतक की पत्नी अंकिता सिंह और उनकी बहनें लगातार न्याय की मांग कर रही हैं। परिवार का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और वे एनकाउंटर व बुलडोजर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। परिवार की आर्थिक और भावनात्मक स्थिति बेहद खराब है, क्योंकि मनीष अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं।इस मामले में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ फरार बताए जा रहे हैं। कुछ आरोपियों पर इनाम घोषित कर मुठभेड़ के बाद गिरफ्तारी भी की गई है। प्रशासन ने आरोपियों के मकानों की जांच और पैमाइश की कार्रवाई भी शुरू कर दी है, और अवैध निर्माण मिलने पर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया की बात कही जा रही है।घटना के बाद से ग्रामीणों में डर का माहौल है। कई लोग मीडिया या बाहरी लोगों से बात करने से बच रहे हैं। गांव में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हैं और लोग सुरक्षा को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं।पूरा मामला अब कानून-व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया के बीच संतुलन की चुनौती बन गया है, जहां एक ओर पीड़ित परिवार सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं प्रशासन स्थिति को नियंत्रित रखने में जुटा है।